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इलाहाबाद हाईकोर्ट: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े पॉक्सो मामले से जज ने खुद को किया अलग, अब नई पीठ करेगी सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद से जुड़े पॉक्सो (POCSO) मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इस संवेदनशील मामले की सुनवाई कर रही पीठ के न्यायाधीश ने खुद को केस से अलग कर लिया है, जिससे अब कानूनी प्रक्रिया में नया मोड़ आने की संभावना है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े पॉक्सो मामले से जज ने खुद को किया अलग, अब नई पीठ करेगी सुनवाई

​शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य के खिलाफ चल रहे पॉक्सो मामले में उस समय नया मोड़ आया जब न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) करने का निर्णय लिया।

​क्या है पूरा विवाद और अवमानना याचिका?

​यह मामला मूल रूप से शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ दर्ज एक पॉक्सो केस से जुड़ा है। मामले के शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने हाईकोर्ट में एक अवमानना याचिका दाखिल की थी।

​याचिका में निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए गए हैं:

​आरोपियों को मिली जमानत की शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है।

​अदालत द्वारा दिए गए निर्देशों और आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया गया है।

​न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को कम करने की कोशिश की गई है।

​न्यायाधीश के हटने के बाद की स्थिति

​न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने सुनवाई के दौरान बिना किसी विशिष्ट कारण का सार्वजनिक उल्लेख किए खुद को इस केस से अलग कर लिया। न्यायिक परंपरा के अनुसार, जब कोई न्यायाधीश किसी मामले से खुद को अलग करता है, तो मामला मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के पास भेजा जाता है।

​आगे की प्रक्रिया: नई पीठ का गठन

​अब हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नई पीठ का गठन किया जाएगा। जब तक नई पीठ के सामने मामला सूचीबद्ध नहीं होता, तब तक अवमानना याचिका और जमानत के उल्लंघन से जुड़े दावों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सकेगा।

​इस हाई-प्रोफाइल मामले में शंकराचार्य की छवि और पॉक्सो जैसे गंभीर कानून के प्रावधान जुड़े होने के कारण कानूनी गलियारों से लेकर संतों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई पीठ इस मामले में क्या रुख अपनाती है।

​अगली सुनवाई की तिथि नई पीठ के गठन के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

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