उत्तराखंड

​चुनावी जीत में चला ‘उत्तराखंड मॉडल’ का जादू: बंगाल और असम में UCC बना भाजपा की जीत का आधार

​चुनावी जीत में चला ‘उत्तराखंड मॉडल’ का जादू: बंगाल और असम में UCC बना भाजपा की जीत का आधार

​देहरादून/नई दिल्ली | 4 मई, 2026

​पश्चिम बंगाल और असम के हालिया चुनाव परिणामों ने न केवल भाजपा की राजनीतिक पकड़ को मजबूत किया है, बल्कि ‘उत्तराखंड मॉडल’ की सफलता पर भी मुहर लगा दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों राज्यों में भाजपा को मिली प्रचंड जीत के पीछे समान नागरिक संहिता (UCC) को घोषणा पत्र में शामिल करना एक गेम-चेंजर साबित हुआ है।

​गंगोत्री से गंगा सागर तक UCC की गूँज

​उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में जनवरी 2025 में UCC को धरातल पर उतारा। अब यही मॉडल चुनावी राज्यों के लिए नजीर बन गया है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल और असम के संकल्प पत्र में उत्तराखंड की तर्ज पर UCC लागू करने का वादा किया था, जिसे जनता, विशेषकर महिला और युवा मतदाताओं ने भरपूर समर्थन दिया है।

​राष्ट्रीय एजेंडे का नया स्तंभ

​अनुच्छेद 370 की समाप्ति और राम मंदिर निर्माण जैसे बड़े वैचारिक मुद्दों को पूरा करने के बाद, भाजपा अब UCC को अपने अगले बड़े राष्ट्रीय एजेंडे के रूप में देख रही है।

​महिला अधिकार और समानता: भाजपा ने UCC को केवल एक कानून के तौर पर नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और नागरिक समानता के अधिकार के रूप में प्रचारित किया है।

​व्यापक स्वीकार्यता: शहरी क्षेत्रों और आधुनिक सोच रखने वाले युवाओं के बीच इस मुद्दे ने वैचारिक पकड़ बनाई है।

​उत्तराखंड: भाजपा का “मॉडल स्टेट”

​आजाद भारत में उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य बना जहाँ विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों को एक समान कानूनी ढांचे के भीतर लाया गया।

​गुजरात में तैयारी: उत्तराखंड की सफलता को देखते हुए गुजरात सरकार भी इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। गुजरात द्वारा गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसका मसौदा काफी हद तक उत्तराखंड मॉडल पर ही आधारित है।

​आगामी चुनाव: जानकारों का मानना है कि बंगाल और असम में मिली इस जीत का सकारात्मक असर अगले साल (2027) उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिलेगा।

​निष्कर्ष: “उत्तराखंड से निकली UCC की यह धारा अब गंगा सागर (बंगाल) तक पहुँचती दिख रही है, जो भविष्य की भारतीय राजनीति की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।”

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