उत्तराखंड में ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की पिच पर कांग्रेस: कुमारी शैलजा का केदार-बदरि दौरा, क्या बदलेंगे सियासी समीकरण?
उत्तराखंड में ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की पिच पर कांग्रेस: कुमारी शैलजा का केदार-बदरि दौरा, क्या बदलेंगे सियासी समीकरण?
देहरादून | राजनीतिक विश्लेषण उत्तराखंड की शांत वादियों में इस बार चुनावी बिगुल शंखनाद के साथ बजने वाला है। आगामी विधानसभा चुनावों (2027) की जमीन तैयार करने के लिए कांग्रेस ने एक ऐसी रणनीति अपनाई है, जिसे अब तक भारतीय जनता पार्टी का ‘मजबूत किला’ माना जाता रहा है। पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा 6 मई से गढ़वाल मंडल के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों और धामों का दौरा शुरू करने जा रही हैं।
कांग्रेस का यह ‘धाम दौरा’ केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ‘आस्था के जरिए सत्ता’ तक पहुँचने की एक सोची-समझी सियासी बिसात माना जा रहा है।
6 दिवसीय दौरे का पूरा शेड्यूल (6 मई – 11 मई)
कुमारी शैलजा का यह दौरा गढ़वाल के चार प्रमुख जिलों—पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी—को कवर करेगा:
6 मई: ऋषिकेश आगमन और रात्रि विश्राम।
7 मई: श्रीनगर (गढ़वाल) में जिला कांग्रेस कमेटी के साथ पहली बड़ी रणनीतिक बैठक।
8 मई: केदारनाथ धाम में दर्शन और पूजा-अर्चना। इसी दिन अगस्त्यमुनि और रुद्रप्रयाग में कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलेंगी।
9 मई: चमोली जिले का दौरा और बदरीनाथ धाम में रात्रि विश्राम।
10 मई: बदरीनाथ मंदिर में विशेष पूजा और जोशीमठ में स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठक।
11 मई: टिहरी गढ़वाल के चंबा में कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और दौरे का समापन।
सियासी पिच पर ‘आस्था’ की गुगली
उत्तराखंड में लंबे समय से भाजपा ने ‘सनातन’ और ‘हिंदुत्व’ के मुद्दों पर अपनी पकड़ बनाए रखी है। अब कांग्रेस उसी पिच पर उतरकर भाजपा के एकाधिकार को चुनौती दे रही है।
पार्टी के भीतर दो नजरिए:
संगठनात्मक मजबूती: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का मानना है कि इस दौरे से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरेगी और पार्टी को मजबूती मिलेगी।
सॉफ्ट हिंदुत्व: राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे सांस्कृतिक केंद्रों से अभियान शुरू करना यह संदेश देता है कि कांग्रेस अब बहुसंख्यक भावनाओं को नजरअंदाज नहीं करेगी।
नेताओं के तीखे वार-पलटवार
कांग्रेस नेता अमेंद्र बिष्ट ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा:
”धर्म हमारे लिए आस्था का विषय है, राजनीति का नहीं। भाजपा और पीएम मोदी हमेशा चुनावों से पहले धार्मिक कार्ड खेलते हैं। हम केवल जनता और अपनी परंपराओं से जुड़ने जा रहे हैं।”
वहीं, विपक्ष (भाजपा) का तर्क है कि कांग्रेस चुनाव आते ही ‘चुनावी हिंदू’ बन जाती है और यह दौरा केवल जनता को गुमराह करने की कोशिश है।
चुनौतियां और रणनीति
गढ़वाल का यह क्षेत्र (रुद्रप्रयाग, चमोली, चंबा) भौगोलिक रूप से कठिन होने के साथ-साथ सामरिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। यहाँ धार्मिक आस्था का गहरा प्रभाव है। कुमारी शैलजा का 5-6 दिनों का यह सघन दौरा यह जांचने की कोशिश है कि क्या कांग्रेस अपने ‘धर्मनिरपेक्ष’ चेहरे के साथ ‘धार्मिक प्रतीकों’ को सफलतापूर्वक जोड़ पाती है या नहीं।
निष्कर्ष: बदरी-केदार की पहाड़ियों से निकलने वाला यह सियासी संदेश कितना प्रभावी होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन इतना तय है कि उत्तराखंड की राजनीति अब विकास के साथ-साथ ‘आस्था के शक्ति प्रदर्शन’ की ओर मुड़ चुकी है।
