उत्तराखंड

मसूरी में पर्यटकों की सुरक्षा से ‘खिलवाड़’!: झूलाघर का चर्चित रेंजर झूला सील, पालिका और संचालक में ठनी

मसूरी में पर्यटकों की सुरक्षा से ‘खिलवाड़’!: झूलाघर का चर्चित रेंजर झूला सील, पालिका और संचालक में ठनी

​मसूरी | पर्यटन डेस्क पहाड़ों की रानी मसूरी में पर्यटन सीजन अपने चरम पर है, लेकिन इसी बीच माल रोड स्थित प्रसिद्ध ‘झूलाघर’ से एक बड़ी खबर आ रही है। नगर पालिका प्रशासन ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी और आवश्यक दस्तावेज न होने के चलते चर्चित रेंजर झूले को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई के बाद झूला संचालक और पालिका अधिकारियों के बीच विवाद गहरा गया है।

​क्यों हुई कार्रवाई? पालिका ने गिनाईं कमियां

​नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) गौरव भसीन ने बताया कि पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सील करने के मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

​IIT रुड़की की रिपोर्ट का अभाव: पालिका की शर्तों के अनुसार, हर साल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की से झूले का तकनीकी परीक्षण कराना और ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) लेना अनिवार्य है, जो इस बार नहीं दिया गया।

​बकाया शुल्क: झूला संचालक द्वारा नगर पालिका का वार्षिक शुल्क भी जमा नहीं कराया गया था।

​नोटिस की अनदेखी: प्रशासन का दावा है कि इस संबंध में कई बार नोटिस दिए गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

​संचालक का पलटवार: “प्रशासन कर रहा है परेशान”

​वहीं, रेंजर झूला संचालक गौरव रावत ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने पालिका प्रशासन पर ही लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा:

​पत्राचार में देरी: गौरव रावत के अनुसार, नियमानुसार IIT रुड़की को निरीक्षण के लिए पत्र नगर पालिका की ओर से भेजा जाना था।

​IIT का रुख: संचालक ने दावा किया कि IIT रुड़की ने उन्हें स्पष्ट कहा है कि वे तकनीकी परीक्षण के लिए तभी आएंगे जब पत्राचार नगर पालिका परिषद के माध्यम से होगा।

​बेवजह की कार्रवाई: संचालक का आरोप है कि उन्होंने विशेषज्ञों को बुलाने के लिए पालिका को प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन उसे नजरअंदाज कर सीधे झूला सील कर दिया गया।

​पर्यटन पर पड़ेगा असर

​झूलाघर का यह रेंजर झूला मसूरी आने वाले सैलानियों के बीच काफी लोकप्रिय है। पर्यटन सीजन के बीचो-बीच इसके बंद होने से न केवल पर्यटकों के मनोरंजन में कमी आएगी, बल्कि स्थानीय छोटे कारोबारियों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।

​चेतावनी: झूला संचालक गौरव रावत ने कहा है कि वे इस ‘एकतरफा’ कार्रवाई के खिलाफ कानूनी सलाह ले रहे हैं और न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

​प्रशासन का स्पष्ट संदेश: नगर पालिका ने साफ कर दिया है कि जब तक तकनीकी फिटनेस की रिपोर्ट और बकाया शुल्क जमा नहीं होता, झूला नहीं खुलेगा। पर्यटकों की जान जोखिम में डालकर किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती।

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