Monday, June 29, 2026
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​बैसाखी 2026: खुशहाली और आस्था का संगम; जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

आज 14 अप्रैल, 2026 को पूरे भारत में बैसाखी का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह त्योहार न केवल रबी की फसल कटने की खुशी का प्रतीक है, बल्कि इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी बहुत गहरा है।

​बैसाखी 2026: खुशहाली और आस्था का संगम; जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

​बैसाखी का त्योहार सौर नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब मेष संक्रांति के साथ वैशाख महीने का आरंभ होता है। पंजाब और हरियाणा में इसे मुख्य रूप से फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

​बैसाखी 2026: शुभ मुहूर्त

​ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष बैसाखी पर सूर्य का मेष राशि में प्रवेश और पूजा का विशेष समय निम्नलिखित है:

​मेष संक्रांति क्षण: दोपहर 02:45 बजे (14 अप्रैल)

​पुण्य काल: दोपहर 01:15 बजे से शाम 06:30 बजे तक

​महा पुण्य काल: दोपहर 02:30 बजे से शाम 04:45 बजे तक

​मान्यता: ऐसी मान्यता है कि पुण्य काल के दौरान पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

​धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

​बैसाखी का महत्व अलग-अलग समुदायों के लिए विशिष्ट है:

​1. खालसा पंथ की स्थापना

​सिख धर्म के लिए यह दिन ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। साल 1699 में इसी दिन सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में ‘खालसा पंथ’ की स्थापना की थी। उन्होंने ‘पंच प्यारों’ को अमृत छकाया था, जिसके बाद से ही सिख समुदाय में नाम के आगे ‘सिंह’ और ‘कौर’ लगाने की परंपरा शुरू हुई।

​2. हिंदू धर्म में महत्व

​हिंदू धर्म में मान्यता है कि हज़ारों साल पहले इसी दिन गंगा धरती पर उतरी थीं। इसलिए, हरिद्वार, ऋषिकेश और वाराणसी जैसे तीर्थों पर आज के दिन गंगा स्नान का विशेष फल माना जाता है। बंगाल में इसे ‘पोइला बैसाख’ और केरल में ‘विशु’ के नाम से मनाया जाता है।

​3. किसानों का उत्सव

​किसानों के लिए बैसाखी धन्यवाद प्रकट करने का दिन है। सर्दियों की फसल (गेहूं) पककर तैयार हो जाती है, जिसे देखकर किसान ‘भांगड़ा’ और ‘गिद्दा’ के जरिए अपनी खुशी जाहिर करते हैं और ईश्वर को अच्छी फसल के लिए भोग लगाते हैं।

​कैसे मनाएं बैसाखी?

​गुरुद्वारा दर्शन: आज के दिन गुरुद्वारों में विशेष अरदास और कीर्तन होता है। ‘नगर कीर्तन’ निकाला जाता है और ‘लंगर’ की विशेष व्यवस्था होती है।

​दान-पुण्य: आज के दिन अनाज और जल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

​पकवान: घरों में मीठे चावल, केसरी हलवा और विशेष पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं।

​हैप्पी बैसाखी 2026! यह नया साल आपके जीवन में समृद्धि और मिठास लेकर आए।

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