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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: कल PM मोदी करेंगे उद्घाटन; 7 घंटे का सफर अब सिर्फ 150 मिनट में, जानें इस ‘स्मार्ट हाईवे’ की 5 बड़ी खासियतें

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: कल PM मोदी करेंगे उद्घाटन; 7 घंटे का सफर अब सिर्फ 150 मिनट में, जानें इस ‘स्मार्ट हाईवे’ की 5 बड़ी खासियतें

​नई दिल्ली/देहरादून: देश के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में कल एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल 2026 को ‘बाबा साहेब अंबेडकर जयंती’ के पावन अवसर पर बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का भव्य उद्घाटन करेंगे। 210 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे न केवल दो राज्यों की दूरी कम करेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक तस्वीर भी बदल देगा।

​1. सफर में समय की महा-बचत

​इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यात्रा के समय में आएगा:

​दिल्ली से देहरादून: पहले लगने वाले 6-7 घंटे के मुकाबले अब यह सफर मात्र 2.5 घंटे में पूरा होगा।

​दिल्ली से हरिद्वार: एक्सप्रेसवे के ‘स्पर’ (कनेक्टिंग रोड) की मदद से अब श्रद्धालु सिर्फ 2 घंटे में हरिद्वार पहुंच सकेंगे।

​रफ्तार: 6-लेन के इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 100 किमी/घंटा निर्धारित की गई है।

​2. तीन राज्यों के इन 6 जिलों की चमकेगी किस्मत

​यह एक्सप्रेसवे दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच एक लाइफलाइन का काम करेगा। इसका रूट इन प्रमुख क्षेत्रों को कवर करता है:

​दिल्ली: अक्षरधाम (NH-24) से शुरुआत, गीता कॉलोनी और लोनी एलिवेटेड सेक्शन।

​उत्तर प्रदेश: गाजियाबाद (लोनी), बागपत (खेकड़ा, बड़ौत), शामली और सहारनपुर। मुजफ्फरनगर की सीमाओं को भी यह स्पर्श करता है।

​उत्तराखंड: देहरादून (अंतिम गंतव्य)।

​3. एशिया का सबसे लंबा ‘वाइल्डलाइफ कॉरिडोर’

​विकास और पर्यावरण के संतुलन का यह बेहतरीन उदाहरण है। राजाजी नेशनल पार्क के पास जानवरों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं:

​12 किमी एलिवेटेड सेक्शन: यह एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, जो नेशनल पार्क के ऊपर से गुजरता है।

​बाधा रहित आवाजाही: एक्सप्रेसवे के नीचे से हाथी, बाघ और अन्य वन्यजीव बिना किसी शोर या दुर्घटना के खतरे के आ-जा सकेंगे।

​साउंड बैरियर्स: वाहनों के शोर से जानवरों को परेशानी न हो, इसके लिए विशेष साउंड प्रूफ दीवारें लगाई गई हैं।

​4. स्मार्ट फीचर्स और मॉडर्न तकनीक

​यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह से इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS) से लैस है:

​स्मार्ट मॉनिटरिंग: हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे और ऑटोमैटिक एक्सीडेंट डिटेक्शन सिस्टम।

​वे-इन-मोशन: चलते हुए वाहनों का वजन मापने वाली तकनीक ताकि ओवरलोडेड गाड़ियों पर नजर रखी जा सके।

​स्थानीय संस्कृति: सहारनपुर के पास ‘वे-साइड एमिनिटी’ में पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के हस्तशिल्प और व्यंजनों के विशेष हब बनाए गए हैं।

​5. निर्माण की बड़ी चुनौतियां

​दिल्ली के भीतर अक्षरधाम जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके से इसे शुरू करना एक चुनौती थी।

​नागरिक सुविधाएं: जमीन के नीचे बिछी गैस और पानी की पाइपलाइनों को प्रभावित किए बिना ‘पाइलिंग’ तकनीक से इसका निर्माण किया गया।

​कनेक्टिविटी: शहर के भीतर एलिवेटेड रोड होने के कारण स्थानीय ट्रैफिक में फंसे बिना वाहन सीधे एक्सप्रेसवे पर चढ़ सकेंगे।

​उद्घाटन का समय: कल, 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री द्वारा हरी झंडी दिखाए जाने के तुरंत बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। यह एक्सप्रेसवे न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि बागपत, शामली और सहारनपुर जैसे औद्योगिक बेल्ट के लिए तरक्की के नए द्वार खोलेगा।

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