बड़ी कूटनीतिक जीत: ईरान में फंसे 312 और भारतीय मछुआरे सुरक्षित स्वदेश लौटे, जयशंकर ने आर्मेनिया का जताया आभार
बड़ी कूटनीतिक जीत: ईरान में फंसे 312 और भारतीय मछुआरे सुरक्षित स्वदेश लौटे, जयशंकर ने आर्मेनिया का जताया आभार
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भारी तनाव और संघर्ष के बीच भारत सरकार ने एक बार फिर अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बड़ी सफलता हासिल की है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शनिवार को जानकारी दी कि 312 और भारतीय मछुआरों को ईरान से आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित भारत वापस लाया गया है।
आर्मेनिया बना भारत का भरोसेमंद साझेदार
विदेश मंत्री ने इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए आर्मेनिया सरकार और वहां के विदेश मंत्री अरारत मिर्जोयान का विशेष रूप से धन्यवाद किया। डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा:
”312 और भारतीय मछुआरों को आर्मेनिया के रास्ते ईरान से सुरक्षित भारत लाया गया। इसे मुमकिन बनाने के लिए आर्मेनिया सरकार और मेरे दोस्त अरारत मिर्जोयान का शुक्रिया।”
प्रमुख आंकड़े:
ताजा वापसी: 312 मछुआरे।
5 अप्रैल की वापसी: 345 मछुआरे (चेन्नई पहुंचे थे)।
कुल रेस्क्यू: विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 1,200 से ज्यादा भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें से 996 ने आर्मेनिया के जरिए ट्रांजिट किया।
इस्लामाबाद में दुनिया की नजरें: अमेरिका-ईरान वार्ता शुरू
एक तरफ जहाँ भारत अपने नागरिकों को सुरक्षित निकाल रहा है, वहीं दूसरी ओर खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ऐतिहासिक बातचीत शुरू हो गई है।
अमेरिकी नेतृत्व: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस उच्च स्तरीय डेलिगेशन का नेतृत्व कर रहे हैं। वे शनिवार सुबह करीब 11:15 बजे इस्लामाबाद पहुंचे।
उम्मीद की किरण: जेडी वेंस ने मीडिया से बातचीत में सकारात्मकता की उम्मीद जताई और कहा कि पूरी दुनिया की नजरें इस वार्ता पर हैं क्योंकि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और स्थिरता पर पड़ेगा।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह ऑपरेशन?
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की कगार पर खड़ा कर दिया है। ऐसी स्थिति में भारतीय नागरिकों, विशेषकर मछुआरों को निकालना चुनौतीपूर्ण था।
सुरक्षित कॉरिडोर: ईरान से सीधे भारत आने के बजाय आर्मेनिया को ‘ट्रांजिट रूट’ (रास्ते) के रूप में इस्तेमाल करना भारत की सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
आर्मेनिया-भारत संबंध: यह ऑपरेशन भारत और आर्मेनिया के बीच मजबूत होते रक्षा और कूटनीतिक संबंधों की एक और मिसाल है।
वैश्विक प्रभाव: जहाँ अमेरिका और ईरान पाकिस्तान में बातचीत की मेज पर हैं, वहीं भारत ने ‘सॉफ्ट पावर’ और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का उपयोग कर अपने लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।
निष्कर्ष:
भारत सरकार का ‘ऑपरेशन रेस्क्यू’ यह दर्शाता है कि संघर्ष क्षेत्रों में भी भारतीय कूटनीति सक्रिय और प्रभावी है। अब सबकी नजरें इस्लामाबाद वार्ता पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि मिडल ईस्ट में शांति बहाल होगी या तनाव और गहराएगा।
