ईरान-अमेरिका तनाव: पाकिस्तान की मध्यस्थता मजबूरी, भारत की प्राथमिकता अपनी अर्थव्यवस्था: शशि थरूर
ईरान-अमेरिका तनाव: “पाकिस्तान की मध्यस्थता मजबूरी, भारत की प्राथमिकता अपनी अर्थव्यवस्था” — शशि थरूर
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता पर भारत में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारत सरकार की भूमिका पर उठ रहे सवालों के बीच, कांग्रेस सांसद और पूर्व अंतरराष्ट्रीय राजनयिक शशि थरूर ने एक बड़ा बयान दिया है। थरूर ने स्पष्ट किया कि इस मामले में भारत और पाकिस्तान की स्थितियों में जमीन-आसमान का अंतर है और इसमें किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा की कोई गुंजाइश नहीं है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता: कूटनीति या विवशता?
शशि थरूर ने पाकिस्तान की भूमिका को उसकी भौगोलिक और सामाजिक ‘मजबूरी’ करार दिया है। उनके बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
शरणार्थी संकट का डर: थरूर ने कहा कि पाकिस्तान, ईरान का पड़ोसी है और दोनों देशों के बीच 900 किलोमीटर लंबी सीमा है। यदि ईरान पर हमले तेज होते हैं, तो युद्ध के कारण पलायन करने वाले शरणार्थी सीधे पाकिस्तान की सीमाओं पर दबाव डालेंगे।
आंतरिक सुरक्षा: पाकिस्तान में लगभग 4 करोड़ शिया आबादी रहती है। ईरान के साथ किसी भी बड़े संघर्ष का असर पाकिस्तान के आंतरिक सांप्रदायिक संतुलन और सुरक्षा पर पड़ना तय है।
”वॉशिंगटन के इशारे पर हो रही है बातचीत”
शशि थरूर ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि पाकिस्तान यह मध्यस्थता अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि अमेरिका के निर्देश पर कर रहा है।
लिखा-लिखाया मैसेज: थरूर ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के एक पोस्ट का जिक्र करते हुए कहा कि उसकी हेडिंग में ‘Draft: Message for PM on X’ लिखा होना यह दर्शाता है कि भाषा वॉशिंगटन से आई थी।
अमेरिकी भाषा का प्रभाव: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान की आधिकारिक पोस्ट में इस्तेमाल किए गए शब्द और शैली बिल्कुल वैसी ही थी जैसी डोनाल्ड ट्रंप इस्तेमाल करते हैं। इसलिए, ऐसी भूमिका केवल पाकिस्तान ही निभा सकता है क्योंकि वह अमेरिका के प्रभाव में है।
भारत का नजरिया: रणनीतिक हित और आर्थिक सुरक्षा
थरूर के अनुसार, भारत इस मामले में ‘साइलेंट’ नहीं है, बल्कि उसके हित अलग और अधिक महत्वपूर्ण हैं:
ऊर्जा सुरक्षा पर प्रहार: भारत की अर्थव्यवस्था काफी हद तक खाड़ी देशों से आने वाली प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम पर टिकी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते होने वाली यह आपूर्ति युद्ध के कारण बाधित हुई है, जिससे भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।
प्रवासियों की सुरक्षा: खाड़ी के देशों में लाखों की संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं। थरूर ने जोर देकर कहा कि उनकी सुरक्षा भारत सरकार की पहली प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार का युद्ध भारत के हित में नहीं है।
निष्कर्ष
शशि थरूर ने साफ किया कि शांति और समाधान ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि युद्ध जल्द खत्म हो, लेकिन पाकिस्तान की मध्यस्थता को भारत की कूटनीतिक हार के रूप में देखना गलत है, क्योंकि पाकिस्तान की भूमिका केवल एक ‘मैसेंजर’ की है जो अपने आकाओं के निर्देश पर काम कर रहा है।
