उत्तराखंड में डिजिटल जनगणना का शंखनाद: राज्यपाल ने की पहली ‘स्वगणना’, 24 अप्रैल तक जनता के पास मौका
उत्तराखंड में डिजिटल जनगणना का शंखनाद: राज्यपाल ने की पहली ‘स्वगणना’, 24 अप्रैल तक जनता के पास मौका
उत्तराखंड में आज से राष्ट्रीय जनगणना-2027 के प्रथम चरण की ऐतिहासिक शुरुआत हो गई है। प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह ने राजभवन (लोक भवन) में खुद अपनी ‘स्वगणना’ (Self Enumeration) कर इस अभियान का विधिवत शुभारंभ किया। देश के इतिहास में यह पहली बार है जब नागरिकों को अपनी जानकारी स्वयं डिजिटल माध्यम से दर्ज करने का विकल्प दिया गया है।
10 से 24 अप्रैल तक ‘स्वगणना’ का अवसर
प्रदेश की जनता अब घर बैठे जनगणना पोर्टल पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकती है।
महत्वपूर्ण तिथि: स्वगणना की प्रक्रिया 10 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक चलेगी।
अगला चरण: 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर मकानों का सूचीकरण करेंगे।
पोर्टल: नागरिक आधिकारिक वेबसाइट se.census.gov.in पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
स्वगणना के दौरान बरतें ये सावधानियां (महत्वपूर्ण निर्देश)
जनगणना निदेशालय ने जनता से अपील की है कि डिजिटल फॉर्म भरते समय सावधानी बरतें ताकि डेटा सटीक रहे:
एक मोबाइल, एक परिवार: एक मोबाइल नंबर का उपयोग केवल एक परिवार के रजिस्ट्रेशन के लिए ही करें।
मुखिया का चयन: परिवार के मुखिया का नाम एक बार दर्ज होने के बाद उसे बदला नहीं जा सकेगा।
भाषा का चुनाव: पोर्टल पर 16 भाषाएं उपलब्ध हैं। जिस भाषा में आप सहज हों, उसी का चयन करें क्योंकि सवाल उसी भाषा में आएंगे।
जिओ टैगिंग: कोशिश करें कि स्वगणना अपने घर से ही करें ताकि गूगल मैप पर आपके घर की लोकेशन (Geo-tagging) सही ढंग से मार्क हो सके।
SE ID को रखें सुरक्षित: फॉर्म सबमिट करने के बाद मोबाइल पर 11 अंकों की SE ID (जैसे HXXXXXXXXXXX) प्राप्त होगी। इसे संभाल कर रखें, क्योंकि जब प्रगणक आपके घर आएंगे, तो उन्हें यही आईडी देनी होगी।
5 चरणों में पूछे जाएंगे 33 सवाल
स्वगणना के दौरान परिवारों से कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिन्हें पांच श्रेणियों में बांटा गया है:
स्थान और मकान का विवरण: जिले का नाम, पिन कोड, मकान की छत, दीवार और फर्श में इस्तेमाल सामग्री।
परिवार की जानकारी: कुल सदस्य, मुखिया का लिंग, जाति (SC/ST/अन्य) और मकान के स्वामित्व की स्थिति।
सुविधाएं और संपत्तियां: पेयजल का स्रोत, बिजली, शौचालय का प्रकार, रसोई घर और LPG कनेक्शन।
डिजिटल और वाहन: इंटरनेट सुविधा, लैपटॉप, स्मार्टफोन, साइकिल, टीवी और कार/जीप की जानकारी।
अनाज: परिवार में खाए जाने वाले मुख्य अनाज का विवरण।
15 साल बाद हो रही है देश की गणना
पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जिसके 15 साल बाद अब यह प्रक्रिया होने जा रही है।
2011 का आंकड़ा: भारत की जनसंख्या तब लगभग 121 करोड़ थी।
उत्तराखंड की स्थिति: 2001 में राज्य की जनसंख्या 84.89 लाख थी, जो 2011 में बढ़कर 1.008 करोड़ पार कर गई थी। 2027 की इस गणना से राज्य की वर्तमान आबादी और आर्थिक स्थिति का सटीक अनुमान मिल सकेगा।
क्या कहते हैं अधिकारी?
जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि स्वगणना करने से जनता और प्रगणक दोनों का समय बचेगा। प्रगणक को बस आपकी SE ID से डेटा डाउनलोड कर उसकी पुष्टि करनी होगी। वहीं, जनगणना सचिव दीपक गैरोला ने स्पष्ट किया कि स्वगणना की सुविधा वैकल्पिक (Optional) है, इसे अनिवार्य नहीं किया गया है।
निष्कर्ष: यह डिजिटल पहल न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि देश के भविष्य की योजनाओं के लिए सटीक डेटा भी उपलब्ध कराएगी। उत्तराखंड के नागरिक 24 अप्रैल तक इस राष्ट्रीय कर्तव्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं।
