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CBSE का बड़ा फैसला: अब 10वीं में पढ़नी होंगी 3 भाषाएं, गणित और विज्ञान के भी होंगे दो लेवल

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपनी शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) के तहत नए नियमों को मंजूरी दे दी है। यह बदलाव शैक्षणिक सत्र 2025-26 और 2026-27 से प्रभावी रूप से लागू किए जा रहे हैं।

यहाँ सीबीएसई द्वारा किए गए प्रमुख बदलावों की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:

CBSE का बड़ा फैसला: अब 10वीं में पढ़नी होंगी 3 भाषाएं, गणित और विज्ञान के भी होंगे दो लेवल

सीबीएसई ने छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करने और उन्हें अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने की आजादी देने के लिए ‘क्रेडिट सिस्टम’ और ‘मल्टीपल लेवल’ एग्जाम की शुरुआत की है।

1. तीन भाषाओं का फॉर्मूला (Three Language Formula)

अब तक कक्षा 10वीं के छात्रों को दो भाषाएं पढ़नी पड़ती थीं, लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है:

* नया नियम: अब छात्रों को कुल 3 भाषाएं पढ़नी होंगी।

* शर्त: इन 3 भाषाओं में से कम से कम 2 भारतीय भाषाएं होनी अनिवार्य हैं।

* उद्देश्य: छात्रों में भाषाई कौशल को बढ़ाना और भारतीय भाषाओं के प्रति जुड़ाव पैदा करना।

2. गणित और विज्ञान के ‘दो लेवल’ (Standard & Advanced)

गणित की तर्ज पर अब विज्ञान (Science) में भी दो स्तर के विकल्प मिलेंगे:

* मैथ्स: पहले से ही ‘बेसिक’ और ‘स्टैंडर्ड’ लेवल मौजूद है।

* साइंस: अब छात्र अपनी क्षमता के अनुसार ‘स्टैंडर्ड’ (Standard) या ‘एडवांस्ड’ (Advanced) लेवल का चुनाव कर सकेंगे।

* फायदा: जो छात्र आगे चलकर मेडिकल या इंजीनियरिंग नहीं करना चाहते, वे बेसिक या स्टैंडर्ड लेवल चुनकर अपना बोझ कम कर सकते हैं।

3. क्रेडिट सिस्टम की शुरुआत (New Credit System)

सीबीएसई अब उच्च शिक्षा की तर्ज पर स्कूलों में भी क्रेडिट सिस्टम लागू कर रहा है:

* कक्षा 10वीं और 12वीं में पास होने के लिए अब छात्रों को निश्चित ‘क्रेडिट’ अर्जित करने होंगे।

* एक शैक्षणिक वर्ष में लगभग 1200 लर्निंग ऑवर्स (सीखने के घंटे) पूरे करने पर क्रेडिट दिए जाएंगे।

* हर विषय के लिए अलग क्रेडिट पॉइंट निर्धारित किए गए हैं।

4. विषयों की संख्या में बढ़ोतरी

* कक्षा 10वीं: पास होने के लिए अब छात्रों को 5 के बजाय 10 विषयों को पास करना होगा (3 भाषाएं + 7 मुख्य विषय)।

* कक्षा 12वीं: छात्रों को अब 1 के बजाय 2 भाषाएं पढ़नी होंगी, जिसमें से एक भारतीय भाषा होनी चाहिए। पास होने के लिए कुल 6 विषय अनिवार्य होंगे।

5. साल में दो बार बोर्ड परीक्षा

सीबीएसई ने पहले ही घोषणा की है कि छात्रों के तनाव को कम करने के लिए बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जा सकेंगी। छात्र अपने बेस्ट स्कोर को बरकरार रख सकेंगे।

प्रमुख बदलाव एक नजर में:

| बदलाव | पुराना नियम | नया नियम (NCF) |

| भाषा (10वीं) | 2 भाषाएं | 3 भाषाएं (2 भारतीय अनिवार्य) |

| भाषा (12वीं) | 1 भाषा | 2 भाषाएं (1 भारतीय अनिवार्य) |

| विषय (10वीं) | 5 मुख्य विषय | 10 विषय (क्रेडिट आधारित) |

| साइंस लेवल | एक ही सामान्य लेवल | स्टैंडर्ड और एडवांस्ड विकल्प |

विशेषज्ञ की राय: “यह बदलाव छात्रों को रटने की प्रवृत्ति से हटाकर वास्तविक सीखने (Learning) की ओर ले जाएगा। साइंस और मैथ में दो लेवल होने से उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी जो इन विषयों में कमजोर हैं या इन्हें करियर विकल्प के रूप में नहीं देखते।”

निष्कर्ष: सीबीएसई का यह कदम नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य भारतीय शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के करीब लाना और लचीला बनाना है।

 

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