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’40 दिन’ की डेडलाइन और खाने की किल्लत: अर्थशास्त्रियों की चेतावनी से दुनिया में हड़कंप

पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी ईरान-इजरायल युद्ध अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और दुनिया भर के प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष 40 दिनों से ज्यादा खिंचता है, तो दुनिया को भीषण खाद्य संकट और महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।

यहाँ इस आर्थिक संकट की पूरी रिपोर्ट दी गई है:

’40 दिन’ की डेडलाइन और खाने की किल्लत: अर्थशास्त्रियों की चेतावनी से दुनिया में हड़कंप

अप्रैल 2026 की शुरुआत में वैश्विक खाद्य कीमतें 6 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं। जानकारों का मानना है कि यह तो बस शुरुआत है, असली झटका अभी आना बाकी है।

1. क्यों दी गई ’40 दिन’ की चेतावनी?

FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो के अनुसार, युद्ध के शुरुआती 40 दिन ‘बफर पीरियड’ की तरह होते हैं, जहाँ भंडार काम आता है। लेकिन अगर युद्ध इससे आगे बढ़ता है, तो:

* बुवाई पर असर: खाद (Fertilizer) की बढ़ती कीमतों और कमी के कारण किसान खेती कम कर सकते हैं या फसलों का पैटर्न बदल सकते हैं।

* अगली फसल का संकट: मौजूदा फैसलों का असर साल के अंत और 2027 की शुरुआत में मिलने वाली पैदावार पर पड़ेगा, जिससे कीमतें आसमान छू सकती हैं।

2. 6 महीने के हाई पर फूड प्राइस

मार्च-अप्रैल 2026 में FAO फूड प्राइस इंडेक्स में 2.4% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है।

* चीनी और तेल: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण चीनी (7.2% की वृद्धि) और वनस्पति तेल सबसे ज्यादा महंगे हुए हैं।

* गेहूं और अनाज: अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में सूखे की आशंका और बढ़ती ट्रांसपोर्ट लागत ने अनाज की कीमतों को भी ऊपर धकेल दिया है।

3. होर्मुज की नाकाबंदी का ‘फर्टिलाइजर’ कनेक्शन

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) केवल तेल ही नहीं, बल्कि दुनिया के 20% से 30% फर्टिलाइजर एक्सपोर्ट का रास्ता भी है।

* युद्ध के कारण खाद बनाने वाली प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई बाधित हुई है।

* खाद की कमी का सीधा मतलब है कम पैदावार, जो आने वाले महीनों में ‘फूड इन्फ्लेशन’ को 15% से 20% तक बढ़ा सकती है।

4. आम जनता पर क्या होगा असर?

* महंगा राशन: दाल, चावल, तेल और चीनी की कीमतों में सीधी बढ़ोतरी होगी।

* सप्लाई चैन ब्रेक: मालवाहक जहाजों का किराया (Freight Cost) बढ़ने से इम्पोर्टेड सामान महंगे होंगे।

* स्टैगफ्लेशन का खतरा: विशेषज्ञों का डर है कि दुनिया ‘स्टैगफ्लेशन’ (कम ग्रोथ और हाई इन्फ्लेशन) के दौर में जा सकती है, जहाँ कमाई घटेगी और खर्चे बढ़ेंगे।

विशेषज्ञ की राय: “यह केवल एक युद्ध नहीं, बल्कि एक वैश्विक ‘ग्रोसरी इमरजेंसी’ की आहट है। अगर होर्मुज का रास्ता जल्द पूरी तरह नहीं खुला, तो थाली से रोटी और सब्जी महंगी होना तय है।”

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