ईरान-अमेरिका जंग का खौफनाक मोड़: स्टील प्लांट, रणनीतिक पुल और अस्पताल तबाह; मानवीय संकट गहराया
ईरान-अमेरिका जंग का खौफनाक मोड़: स्टील प्लांट, रणनीतिक पुल और अस्पताल तबाह; मानवीय संकट गहराया
ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच जारी युद्ध अब अपने 34वें दिन में प्रवेश कर चुका है। ताजा हमलों ने ईरान के नागरिक और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को तहस-नहस कर दिया है। सैन्य ठिकानों के बाद अब हमलों का रुख देश की आर्थिक रीढ़ और आवश्यक सेवाओं की ओर मुड़ गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में हाहाकार मचा है।
तबाही का रिपोर्ट कार्ड: क्या-क्या हुआ धवस्त?
* औद्योगिक मार (स्टील प्लांट्स): ईरान के सबसे बड़े स्टील उत्पादकों में से एक, मुबारके स्टील कंपनी (Isfahan) और खुजेस्तान स्टील कंपनी (Ahvaz) पर भीषण हवाई हमले किए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन संयंत्रों की उत्पादन इकाइयां पूरी तरह ठप हो गई हैं। स्टील उद्योग पर हमला ईरान की रक्षा निर्माण और आर्थिक क्षमता को सीधे तौर पर पंगु बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
* कनेक्टिविटी पर प्रहार (बी1 ब्रिज): उत्तरी अल्बोरज़ प्रांत में स्थित बी1 ब्रिज, जो पश्चिम एशिया के सबसे ऊंचे पुलों में से एक है, हमलों में पूरी तरह नष्ट हो गया है। इस पुल के टूटने से तेहरान और करज जैसे प्रमुख शहरों के बीच संपर्क टूट गया है और राहत सामग्री की आवाजाही ठप हो गई है।
* स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट: तेहरान स्थित 100 साल पुराने ऐतिहासिक पाश्चर इंस्टीट्यूट (Pasteur Institute) और पश्चिमी तेहरान की दारू बख्श फार्मास्युटिकल फैक्ट्री को बमबारी में भारी नुकसान पहुंचा है। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 300 से अधिक स्वास्थ्य सुविधाएं इस युद्ध की चपेट में आ चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून और युद्ध अपराध के आरोप
जैसे-जैसे नागरिक ठिकानों पर हमले बढ़ रहे हैं, अंतरराष्ट्रीय कानूनों (International Law) की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं:
* जेनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन? एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने चेतावनी दी है कि अस्पतालों, स्कूलों और नागरिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाना युद्ध अपराध (War Crimes) की श्रेणी में आ सकता है।
* सैन्य बनाम नागरिक लक्ष्य: अमेरिका और इजरायल का तर्क है कि इन बुनियादी ढांचों का उपयोग सैन्य उद्देश्यों या हथियारों के भंडारण के लिए किया जा रहा था। वहीं, ईरान ने इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” और “बुनियादी मानवीय मूल्यों पर हमला” करार दिया है।
* अंतरराष्ट्रीय दबाव: संयुक्त राष्ट्र (UN) में ईरान के प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर इन “पूर्व नियोजित और अकारण” हमलों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
जमीन पर क्या है स्थिति?
ताजा हमलों में सैकड़ों नागरिकों के हताहत होने की खबर है। अकेले बी1 ब्रिज पर हुए हमले में कम से कम 8 नागरिकों की मौत और 95 के घायल होने की पुष्टि हुई है। ईरान के कई हिस्सों में बिजली गुल है और इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं।
विशेषज्ञ विश्लेषण: “यह युद्ध अब केवल सीमाओं की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि एक पूरे देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मिटाकर उसे घुटनों पर लाने की कोशिश है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी भविष्य के लिए एक खतरनाक मिसाल पेश कर सकती है।”
