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‘हॉर्मुज में नाविक खोने वाला भारत इकलौता देश’: ईरान जंग पर 60 देशों की बैठक में भारत का कड़ा रुख

ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण जंग के बीच, नई दिल्ली में आयोजित ’60 देशों की आपातकालीन बैठक’ में भारत ने एक कड़ा और भावुक बयान दिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी संघर्ष पर चिंता जताते हुए भारत ने वैश्विक समुदाय को आइना दिखाया है।

‘हॉर्मुज में नाविक खोने वाला भारत इकलौता देश’: ईरान जंग पर 60 देशों की बैठक में भारत का कड़ा रुख

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच छिड़े युद्ध के वैश्विक प्रभावों पर चर्चा करने के लिए भारत की अध्यक्षता में आयोजित 60 देशों की मेगा समिट में विदेश मंत्री ने बड़ा बयान दिया है। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस युद्ध की सबसे बड़ी मानवीय कीमत भारत के निर्दोष नागरिकों ने चुकाई है।

भारत का भावुक और कड़ा संदेश

बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा:

“जब पूरी दुनिया तेल की कीमतों और व्यापारिक मार्गों (Trade Routes) की बात कर रही है, तब भारत अपने बेटों को खोने का दुख झेल रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे इस संघर्ष में अपने नाविकों (Seafarers) को गंवाने वाला भारत फिलहाल इकलौता देश है।”

प्रमुख बिंदु: बैठक की बड़ी बातें

* भारतीय नाविकों की शहादत: युद्ध की शुरुआत से ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में कई भारतीय नाविकों की जान गई है। भारत ने इसे एक ‘अपूरणीय क्षति’ बताया है।

* सुरक्षित गलियारे की मांग: भारत ने 60 देशों के सामने मांग रखी है कि व्यापारिक जहाजों और निर्दोष नाविकों की सुरक्षा के लिए एक ‘न्यूट्रल सेफ कॉरिडोर’ (तटस्थ सुरक्षित गलियारा) बनाया जाए।

* वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला: बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि हॉर्मुज का रास्ता पूरी तरह बंद होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था ढह सकती है, लेकिन इसके साथ ही मानवीय सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

हॉर्मुज की खाड़ी दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग है। ईरान और अमेरिका की जंग के कारण यह क्षेत्र ‘नो गो ज़ोन’ बन चुका है। भारत के हजारों नाविक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर काम करते हैं, जो इस समय सीधे तौर पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की चपेट में हैं।

60 देशों की एकजुटता की कोशिश

इस बैठक में यूरोपीय संघ, खाड़ी देशों और एशियाई देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। भारत ने स्पष्ट किया कि वह अब मूकदर्शक बनकर अपने नागरिकों की जान को खतरे में नहीं डाल सकता।

निष्कर्ष: भारत का यह बयान उन देशों के लिए एक चेतावनी है जो युद्ध को केवल सामरिक या आर्थिक चश्मे से देख रहे हैं। भारत ने साफ कर दिया है कि उसके लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और वह इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने से पीछे नहीं हटेगा।

 

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