ईरान में ‘मौन तख्तापलट’! IRGC ने छीनी राष्ट्रपति से सत्ता, मुजतबा खामेनेई की स्थिति पर गहराया सस्पेंस
अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के राजनीतिक गलियारों से ‘मौन तख्तापलट’ (Silent Coup) की खबरें सामने आ रही हैं। यहाँ इस पूरे घटनाक्रम पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:
ईरान में ‘मौन तख्तापलट’! IRGC ने छीनी राष्ट्रपति से सत्ता, मुजतबा खामेनेई की स्थिति पर गहराया सस्पेंस
ईरान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बड़े नेतृत्व संकट और आंतरिक संघर्ष से गुजर रहा है। ताजा खुफिया रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया (Iran International) के दावों के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने देश की शासन व्यवस्था पर पूरी तरह से अपना ‘डी-फैक्टो’ (वास्तविक) कब्जा जमा लिया है।
1. राष्ट्रपति पेज़ेशकियन हुए ‘शक्तिहीन’
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और IRGC के बीच गहरा गतिरोध पैदा हो गया है।
* फैसलों पर रोक: राष्ट्रपति द्वारा की जाने वाली महत्वपूर्ण नियुक्तियों और कार्यकारी फैसलों को IRGC ने प्रभावी ढंग से रोक दिया है।
* अहमद वाहिदी का दखल: हाल ही में राष्ट्रपति ने एक नए खुफिया मंत्री (Intelligence Minister) की नियुक्ति की कोशिश की थी, जिसे IRGC कमांडर अहमद वाहिदी ने सीधे हस्तक्षेप कर विफल कर दिया।
* संवैधानिक संकट: राष्ट्रपति अब केवल नाममात्र के प्रमुख रह गए हैं, जबकि देश के सभी रणनीतिक और सैन्य फैसले IRGC के जनरलों की एक विशेष ‘सैन्य परिषद’ ले रही है।
2. नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई पर सस्पेंस
9 मार्च, 2026 को अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को नया ‘सुप्रीम लीडर’ घोषित किया गया था। लेकिन उनकी भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं:
* कड़ा पहरा: IRGC ने मुजतबा के चारों ओर एक अभेद्य सुरक्षा घेरा बना लिया है। सूत्रों का कहना है कि उन्हें बाहरी दुनिया और यहां तक कि अन्य सरकारी अधिकारियों से भी अलग-थलग कर दिया गया है।
* रबर स्टैम्प की आशंका: विशेषज्ञों का मानना है कि IRGC मुजतबा को केवल एक ‘धार्मिक मुखौटे’ के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, जबकि सत्ता की असली बागडोर सेना के हाथ में है।
* आंतरिक विद्रोह: खामेनेई के करीबी सर्कल में मुजतबा के चयन और सेना के बढ़ते दखल को लेकर भारी असंतोष है।
3. युद्ध और अस्थिरता का फायदा
अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे भीषण सैन्य संघर्ष (Operation Epic Fury) के बीच IRGC ने खुद को ईरान के रक्षक के रूप में पेश किया है।
* मार्शल लॉ जैसी स्थिति: युद्ध का बहाना बनाकर सेना ने देश के भीतर नागरिक स्वतंत्रता को खत्म कर दिया है।
* विपक्ष पर क्रैकडाउन: राजनीतिक बंदियों और विरोध करने वाले गुटों पर शिकंजा कस दिया गया है। हाल ही में 48 घंटों के भीतर कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं को फांसी दिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
4. अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
मिडिल ईस्ट के इस घटनाक्रम पर दुनिया की नजरें टिकी हैं:
* अमेरिका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान में ‘नया शासन’ (New Regime) युद्धविराम की गुहार लगा रहा है, लेकिन अमेरिका तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हो जाता।
* खाड़ी देश: यूएई और कतर जैसे देश ईरान की आंतरिक अस्थिरता और तेल आपूर्ति में आ रही बाधाओं को लेकर बेहद चिंतित हैं।
निष्कर्ष: ईरान में इस समय निर्वाचित सरकार और शक्तिशाली सेना के बीच ‘वर्चस्व की जंग’ चरम पर है। राष्ट्रपति पेज़ेशकियन का हाशिए पर जाना और मुजतबा खामेनेई की रहस्यमयी चुप्पी इस बात की पुष्टि करती है कि ईरान अब एक सैन्य तानाशाही की ओर बढ़ चुका है।
