ट्रंप का राष्ट्र को संबोधन: ईरान युद्ध पर बड़ी अपडेट, कहा- “2-3 हफ्तों में पूरा हो जाएगा”
ट्रंप का राष्ट्र को संबोधन: ईरान युद्ध पर बड़ी अपडेट, कहा- “2-3 हफ्तों में पूरा हो जाएगा”
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 अप्रैल 2026 को व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित किया। यह उनका ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पहला प्राइम टाइम संबोधन था। ट्रंप ने युद्ध की स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी और दावा किया कि अमेरिका-इजराइल के संयुक्त अभियान के प्रमुख लक्ष्य लगभग पूरे हो चुके हैं।
युद्ध की स्थिति पर क्या कहा ट्रंप ने?
ट्रंप ने कहा कि ऑपरेशन “Epic Fury” के तहत ईरान की नौसेना, वायुसेना और न्यूक्लियर सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। कई प्रमुख नेता मारे गए और ईरान अब कोई बड़ी रणनीतिक धमकी नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध के सबसे मुश्किल चरण से गुजर चुके हैं और अगले 2 से 3 हफ्तों में सभी उद्देश्य पूरे करके अमेरिका वापस आ जाएगा।
ट्रंप ने आगे चेतावनी दी कि अगर जरूरत पड़ी तो ईरान के तेल भंडारों पर भी हमला किया जा सकता है, जिससे ईरान “पत्थर के युग” में चला जाएगा। उन्होंने ईरान पर 47 साल से अमेरिका और इजराइल के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी का आरोप लगाया।
तेल कीमतों और घरेलू प्रभाव पर बात
संबोधन में ट्रंप ने बढ़ती तेल कीमतों का जिक्र भी किया, जो युद्ध के कारण अमेरिकियों की जेब पर बोझ बन रही हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब मध्य पूर्व के तेल पर निर्भर नहीं है क्योंकि वह दुनिया का सबसे बड़ा तेल और गैस उत्पादक बन चुका है। ट्रंप ने सुझाव दिया कि हार्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की जिम्मेदारी उन देशों पर है जो तेल आयात करते हैं।
सहयोगी देशों की तारीफ
ट्रंप ने इजराइल के साथ-साथ सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत और बहरीन जैसे देशों की सराहना की। उन्होंने वादा किया कि अमेरिका इन “महान राष्ट्रों” की रक्षा करेगा और उन्हें नुकसान नहीं होने देगा।
हताहतों का ब्योरा
ट्रंप ने स्वीकार किया कि इस संघर्ष में 13 अमेरिकी सैनिक शहीद हुए हैं। साथ ही उन्होंने ईरानी सरकार पर 45,000 प्रदर्शनकारियों को मारने का आरोप लगाया, हालांकि इसके लिए कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया।
यह संबोधन ऐसे समय आया जब युद्ध पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और घरेलू स्तर पर तेल की ऊंची कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है। ट्रंप ने जोर दिया कि अमेरिका “जीत हासिल कर रहा है” और कोई अनावश्यक राष्ट्र-निर्माण या लंबे समय तक सैनिकों को वहां रखने का इरादा नहीं है।
संबोधन के बाद विश्लेषकों ने इसे युद्ध की प्रगति पर अपडेट के रूप में देखा, लेकिन कुछ ने इसमें नई रणनीति की कमी बताई। अमेरिका में युद्ध के प्रति जनमत मिश्रित है, कई लोग इससे असहमत हैं।
