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होर्मुज को अलविदा! अरब देशों ने नए तेल रूट की तैयारी तेज की, पाइपलाइन चल रही फुल क्षमता पर

होर्मुज को अलविदा! अरब देशों ने नए तेल रूट की तैयारी तेज की, पाइपलाइन चल रही फुल क्षमता पर

दुबई/रियाद: ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) प्रभावी रूप से बंद होने के बाद खाड़ी के अरब देशों ने तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्ते तलाशने में तेजी ला दी है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहले से बनी पाइपलाइनों को अधिकतम क्षमता पर चला रहे हैं, जबकि नए प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा तेज हो गई है। ट्रंप के हालिया संबोधन में अमेरिका की तेल पर निर्भरता न होने की बात के बीच ये देश खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश में जुटे हैं।

मुख्य वैकल्पिक रूट क्या हैं?

सऊदी अरब का ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (पेट्रोलाइन):

यह 1,200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन अबक़ीक़ (पूर्वी प्रांत) से यानबू (रेड सी तट) तक तेल ले जाती है। क्षमता 7 मिलियन बैरल प्रति दिन (mbd) है और वर्तमान में फुल कैपेसिटी पर चल रही है। इससे सऊदी तेल अब होर्मुज के बजाय रेड सी के रास्ते एशिया और यूरोप पहुंच रहा है। यानबू पोर्ट पर टैंकरों की संख्या बढ़ गई है, हालांकि रेड सी में बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य का जोखिम बना हुआ है।

UAE का हबशान-फुजैरा पाइपलाइन (ADCOP):

अबू धाबी के हबशान क्षेत्र से फुजैरा पोर्ट (गल्फ ऑफ ओमान) तक लगभग 380-400 किमी लंबी यह पाइपलाइन 1.5 से 1.8 मिलियन बैरल प्रति दिन तक तेल ले जा सकती है। फुजैरा होर्मुज से बाहर स्थित है, इसलिए तेल सीधे भारतीय महासागर तक पहुंचता है। UAE ने यहां भंडारण क्षमता भी बढ़ाई है, लेकिन कुछ हमलों की रिपोर्ट आई है।

ये दोनों पाइपलाइन मिलाकर करीब 8-9 मिलियन बैरल प्रति दिन का तेल बाहर निकाल सकती हैं, लेकिन होर्मुज से पहले गुजरने वाले 15-20 मिलियन बैरल की तुलना में यह काफी कम है।

आगे की तैयारी क्या है?

नई पाइपलाइनों पर विचार: सऊदी, UAE और अन्य खाड़ी देश अब और बड़े रूट्स पर काम कर रहे हैं। इसमें UAE से ओमान के दुक़्म पोर्ट तक नई लाइन, या कतर-UAE से सऊदी होते हुए जॉर्डन/मेडिटेरेनियन तक लंबा कॉरिडोर शामिल है। कुछ प्रस्तावों की लागत $10 बिलियन या उससे ज्यादा बताई जा रही है।

इराक का रूट: इराक कुर्द क्षेत्र के साथ मिलकर तुर्की के मेडिटेरेनियन तट तक पाइपलाइन का उपयोग बढ़ा रहा है।

चुनौतियां: पाइपलाइनों की क्षमता सीमित है, रेड सी रूट पर हूती हमलों का खतरा, और नई परियोजनाओं के लिए समय और भारी निवेश की जरूरत। फिर भी, ये रूट्स वैश्विक तेल बाजार पर दबाव कुछ हद तक कम कर रहे हैं।

ट्रंप ने अपने संबोधन में साफ कहा था कि अमेरिका को होर्मुज की जरूरत नहीं क्योंकि वह खुद बड़ा तेल उत्पादक है, और बाकी देशों को अपनी सुरक्षा खुद करनी चाहिए। इसी बीच अरब देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में लगे हैं। तेल की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं, लेकिन इन वैकल्पिक रास्तों ने पूर्ण संकट को टालने में मदद की है।

विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय में खाड़ी देशों को होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए और बड़े निवेश करने पड़ेंगे। फिलहाल ये पाइपलाइनें संकट का अस्थायी समाधान साबित हो रही हैं।

(आधारित: अल जजीरा, सीएनबीसी, ब्लूमबर्ग, द नेशनल और अन्य अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स)

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