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मालदा में SIR बवाल: 7 न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे बंधक बनाया, नेशनल हाईवे ब्लॉक… सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को लगाई फटकार

मालदा में SIR बवाल: 7 न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे बंधक बनाया, नेशनल हाईवे ब्लॉक… सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को लगाई फटकार

कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर बुधवार (1 अप्रैल 2026) को हिंसक विरोध प्रदर्शन भड़क गया। गुस्साई भीड़ ने कालियाचक-II ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस (BDO) में SIR की सुनवाई कर रहे 7 न्यायिक अधिकारियों (जिनमें 3 महिलाएं शामिल) को करीब 9 घंटे तक बंधक बनाकर रखा। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 (कोलकाता-सिलीगुड़ी) को भी कई घंटों तक जाम कर दिया, जिससे पूरे इलाके में यातायात ठप हो गया।

क्या है पूरा मामला?

SIR प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने (या अंडर एडजुडिकेशन मार्क) के विरोध में मालदा के कालियाचक, मोथाबाड़ी, सुजापुर समेत कई इलाकों में प्रदर्शन शुरू हुआ। शाम करीब 2:30-4 बजे प्रदर्शनकारियों ने BDO ऑफिस को घेर लिया। जब अधिकारियों से मिलने की मांग ठुकराई गई, तो भीड़ ने घेराव कर दिया। पत्थरबाजी, टायर जलाने और सड़क जाम की घटनाएं भी हुईं।

अधिकारियों को देर रात केंद्रीय बलों और पुलिस की मदद से रेस्क्यू किया गया। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्वतः संज्ञान लिया और मामले की सुनवाई की।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण, गणना किया गया और प्रेरित” बताते हुए बंगाल सरकार की कानून-व्यवस्था को “पूर्ण विफलता” करार दिया।

राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी, होम सेक्रेटरी और मालदा के जिला अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी कर पूछा कि उन पर अवमानना की कार्यवाही क्यों न की जाए।

घटना की जांच CBI या NIA को सौंपने का निर्देश दिया।

चुनाव आयोग को आदेश दिया कि जहां भी न्यायिक अधिकारी SIR काम कर रहे हैं, वहां तुरंत केंद्रीय बल तैनात किए जाएं।

कोर्ट ने कहा कि यह न्यायपालिका पर हमला है और किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

बीजेपी ने टीएमसी पर भीड़ भड़काने का आरोप लगाया और ममता बनर्जी सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।

टीएमसी ने इसे चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर गुस्सा बताया और कहा कि नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है।

मालदा में SIR के दौरान करीब 8.30 लाख मामलों की सुनवाई चल रही है और जिले में बड़ी संख्या में नामों को अंडर एडजुडिकेशन या डिलीट किया गया है। बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले यह घटना चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा और निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वह SIR प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं करेगा और पूरे राज्य में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।

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