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भोजशाला मंदिर-मस्जिद विवाद: हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई शुरू, पांच याचिकाएं लंबित; सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को हाईकोर्ट भेजा

भोजशाला मंदिर-मस्जिद विवाद: हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई शुरू, पांच याचिकाएं लंबित; सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को हाईकोर्ट भेजा

इंदौर/धार: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में नया मोड़ आ गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ अब इस मामले की लगातार सुनवाई कर रही है। हिंदू और मुस्लिम पक्ष की कुल पांच याचिकाएं लंबित हैं, जिन पर एक साथ विचार किया जा रहा है।

हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बेंच (जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी) ने 16 मार्च 2026 को महत्वपूर्ण आदेश दिया था, जिसमें जजों ने खुद विवादित स्थल का निरीक्षण करने का फैसला लिया। इसके बाद 28 मार्च को जजों ने भोजशाला परिसर का दौरा किया और स्तंभों, शिलालेखों तथा अन्य पुरातात्विक अवशेषों का बारीकी से मुआयना किया।

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

1 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें हाईकोर्ट के जजों के स्थल निरीक्षण और ASI सर्वे की वीडियोग्राफी पर आपत्तियों को चुनौती दी गई थी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका देते हुए कहा कि हाईकोर्ट ही सभी आपत्तियों पर अंतिम फैसला करेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया:

ASI सर्वे की वीडियोग्राफी पर मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों को हाईकोर्ट प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार देखेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की और हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

मुस्लिम पक्ष को हाईकोर्ट वापस जाने की सलाह दी गई।

सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि “हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि उच्च न्यायालय सभी आपत्तियों पर उचित तरीके से विचार करेगा।”

क्या है विवाद?

हिंदू पक्ष (हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस) भोजशाला को सरस्वती (वाग्देवी) मंदिर मानता है और ASI सर्वे रिपोर्ट में मिले सबूतों के आधार पर पूजा-अर्चना की मांग कर रहा है। मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है और Places of Worship Act, 1991 का हवाला देता है।

ASI ने 2024 में वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा किया था, जिसकी रिपोर्ट सीलबंद थी। सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के आदेश के बाद रिपोर्ट खोली गई और दोनों पक्षों को आपत्तियां दाखिल करने का समय दिया गया।

अब आगे क्या?

हाईकोर्ट की इंदौर बेंच अब 2 अप्रैल 2026 से नियमित और लगातार सुनवाई करेगी। पांचों याचिकाओं को क्लब करके एक साथ निपटाया जाएगा। हाईकोर्ट के जजों का स्थल निरीक्षण पहले ही हो चुका है, जो मामले की गंभीरता को दिखाता है।

दोनों पक्ष अब हाईकोर्ट में अपनी दलीलें रखेंगे। इस विवाद पर अंतिम फैसला हाईकोर्ट के हाथ में है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल हस्तक्षेप नहीं करेगा।

यह मामला धार जिले की कानून-व्यवस्था और धार्मिक संवेदनशीलता के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों समुदायों में तनाव कम करने के लिए स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर है।

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