किडनी ट्रांसप्लांट का काला कारोबार: कानपुर के अस्पतालों में ऐसे चलता था ‘सीक्रेट नेटवर्क’ — ₹10 लाख में खरीदी, ₹60-90 लाख में बेची गई किडनी
किडनी ट्रांसप्लांट का काला कारोबार: कानपुर के अस्पतालों में ऐसे चलता था ‘सीक्रेट नेटवर्क’ — ₹10 लाख में खरीदी, ₹60-90 लाख में बेची गई किडनी
उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक छोटे से ₹50,000 के भुगतान विवाद ने एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने 31 मार्च 2026 को केशवपुरम/कल्यानपुर क्षेत्र के कई निजी अस्पतालों में छापेमारी की, जिसमें डॉक्टर दंपत्ति समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अब तक 40-60 से ज्यादा अवैध ट्रांसप्लांट का खुलासा हुआ है, जिसमें विदेशी नागरिक (सऊदी अरब आदि) भी शामिल थे।
रैकेट कैसे चलता था?
यह सीक्रेट नेटवर्क गरीबों, बेरोजगार युवाओं और छात्रों को निशाना बनाता था। तरीका इस प्रकार था:
दलाल और भर्ती: एम्बुलेंस चालक, फर्जी डॉक्टर और बिचौलिए टेलीग्राम, सोशल मीडिया और स्थानीय संपर्कों के जरिए गरीबों को लालच देते थे। एक MBA स्टूडेंट ने शिकायत की कि उसकी किडनी ₹10 लाख में खरीदी गई, लेकिन उसे पूरा पैसा नहीं मिला — सिर्फ ₹50,000 के विवाद में पूरा खेल खुल गया।
कीमत का खेल: डोनर को ₹7-10 लाख दिए जाते थे। रिसीवर (मरीज) से ₹60 लाख से ₹90 लाख तक वसूले जाते थे। प्रॉफिट का बड़ा हिस्सा डॉक्टरों, अस्पताल मालिकों और दलालों के बीच बंटता था।
अस्पतालों की भूमिका: मुख्य रूप से आहूजा हॉस्पिटल (केशवपुरम), मेड-लाइफ हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल में ऑपरेशन होते थे। इनमें यूरोलॉजी/ट्रांसप्लांट की कोई वैध अनुमति नहीं थी। अस्पताल ओटी (ऑपरेशन थिएटर) प्रति दिन ₹3.5-4 लाख चार्ज करते थे। लखनऊ से डॉक्टर बुलाए जाते थे।
फर्जी डॉक्टर और स्टाफ: एक आरोपी शिवम अग्रवाल एम्बुलेंस ड्राइवर था, जो फर्जी डॉक्टर बनकर घूमता था। गिरोह में 5 डॉक्टर शामिल थे। कुछ मामलों में फर्जी दस्तावेज और संबंधी दिखाकर ट्रांसप्लांट किए जाते थे।
नेटवर्क का विस्तार: कानपुर से दिल्ली, लखनऊ और अन्य राज्यों तक फैला। विदेशी मरीजों को भी लाया जाता था। कुछ रिपोर्ट्स में 60+ ट्रांसप्लांट का जिक्र है।
गिरफ्तारियां और खुलासे
गिरफ्तार: डॉक्टर प्रीति अहूजा (50) और उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह अहूजा (54), अन्य डॉक्टर राजेश कुमार, राम कुमार आदि, एम्बुलेंस ऑपरेटर और दलाल।
पुलिस ने कई अस्पतालों को सील किया। मरीजों के रिकॉर्ड, दस्तावेज और उपकरण बरामद हुए।
जांच में पता चला कि पिछले 1-2 साल से यह रैकेट सक्रिय था। अब और 4 डॉक्टरों की तलाश चल रही है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल और CMO हरिदत्त नेमी की टीम ने रात में छापेमारी की। FIR दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जांच तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे यूपी में ऐसे नर्सिंग होम्स की जांच शुरू कर दी है।
यह मामला चिकित्सा क्षेत्र में नैतिकता की कमी, अंग तस्करी और निजी अस्पतालों में लापरवाही को उजागर करता है। गरीबों का शोषण कर अमीरों/विदेशियों को अंग मुहैया कराना मानवता के खिलाफ अपराध है।
नोट: जांच अभी जारी है। नए खुलासे हो सकते हैं। आरोपी निर्दोष माने जाते हैं जब तक अदालत दोषी साबित न कर दे।
सलाह: किडनी ट्रांसप्लांट केवल सरकारी/अनुमोदित केंद्रों से ही करवाएं। किसी भी लालच या फर्जी ऑफर पर भरोसा न करें। शोषण की शिकायत तुरंत पुलिस या स्वास्थ्य विभाग से करें।
