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रिंकू सिंह राही कौन हैं? आखिर किस वजह से आजकल सुर्खियों में छाए हुए है —एक इस्तीफे ने मचा दिया है हड़कंप

रिंकू सिंह राही कौन हैं? आखिर किस वजह से आजकल सुर्खियों में छाए हुए है —एक इस्तीफे ने मचा दिया है हड़कंप

उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बने हुए हैं। 31 मार्च 2026 को उन्होंने अचानक सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे में उन्होंने यूपी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए — “सैलरी तो आ रही है, लेकिन पोस्टिंग नहीं, न ही कोई सार्थक काम मिल रहा है। संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक अलग सिस्टम चल रहा है।”

रिंकू सिंह राही की कहानी: संघर्ष से IAS तक

जन्म और पृष्ठभूमि: 20 मई 1982 को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले (गांव ऊसवा, थाना सासनी) में एक साधारण दलित परिवार में जन्म। पिता सौदान सिंह राही छोटी आटा चक्की चलाते थे। प्राथमिक शिक्षा सरकारी स्कूल से। 12वीं अच्छे अंकों से पास करने पर स्कॉलरशिप मिली। टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक किया।

करियर की शुरुआत: 2004 में UPPCS पास की। 2008 में जिला समाज कल्याण अधिकारी बने। नौकरी के साथ UPSC की तैयारी जारी रखी।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई: 2009 में मुजफ्फरनगर में 100 करोड़ रुपये के स्कॉलरशिप घोटाले का खुलासा किया। इसके बदले माफिया ने बैडमिंटन खेलते समय 7 गोलियां मार दीं। दो गोलियां चेहरे पर लगीं, एक आंख की रोशनी चली गई। जानलेवा हमले के बावजूद वे नहीं झुके।

IAS बनना: दिव्यांग कोटे से 13वें प्रयास में 2021 में UPSC क्रैक की (AIR 683)। 2022 बैच में यूपी कैडर मिला।

क्यों छाए हुए हैं सुर्खियों में? (2025-2026 की घटनाएं)

शाहजहांपुर विवाद (2025): पूवायां में SDM के पद पर तैनात हुए। महज 36 घंटे बाद विवाद हो गया। वकीलों के प्रदर्शन के दौरान एक घटना में उन्होंने कुछ लोगों को सार्वजनिक जगह पर पेशाब करने पर सजा दी। बाद में वकीलों को शांत करने के लिए खुद कान पकड़कर उठक-बैठक करने का वीडियो वायरल हो गया। इसके बाद उन्हें तुरंत पद से हटाकर लखनऊ के राजस्व परिषद में अटैच कर दिया गया।

लंबे समय से साइडलाइन: जुलाई 2025 से कोई फील्ड पोस्टिंग या जिम्मेदारी नहीं मिली। वे सिर्फ अटैचमेंट पर थे — सैलरी मिलती रही, लेकिन जनसेवा का मौका नहीं।

इस्तीफा (31 मार्च 2026): राष्ट्रपति को इस्तीफा भेजा। पत्र में कहा — अच्छे काम करने के बावजूद दरकिनार कर दिया गया। पिता सौदान सिंह राही ने भी सिस्टम पर सवाल उठाए।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

रिंकू सिंह राही को ईमानदार और व्हिसलब्लोअर अफसर के रूप में जाना जाता है। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जान जोखिम में डाली, फिर भी IAS बनकर सेवा जारी रखी। उनका इस्तीफा प्रशासनिक व्यवस्था, फील्ड पोस्टिंग और “पैरलल सिस्टम” पर सवाल उठा रहा है। सोशल मीडिया और मीडिया में बहस छिड़ी हुई है — कुछ उन्हें बहादुर बता रहे हैं, तो कुछ विवादित घटनाओं का जिक्र कर रहे हैं।

रिंकू सिंह राही की कहानी साधारण परिवार से उठकर बड़े संघर्ष, ईमानदारी और अंत में निराशा की मिसाल बन गई है। उनका भविष्य अब क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

 

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