अन्तर्राष्ट्रीय

​दुनिया को रास्ता दिखा रहा ब्राजील का ‘इथेनॉल क्रांति’: ईंधन संकट के बीच ‘डुअल-फ्यूल’ मॉडल बना ग्लोबल गेम चेंजर

साओ पाउलो, 31 मार्च 2026: ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण वैश्विक तेल कीमतों में उछाल और आपूर्ति संकट के बावजूद ब्राजील अपने ईंधन बाजार को स्थिर रखने में सफल रहा है। इसका मुख्य कारण देश का दशकों पुराना डुअल-फ्यूल (फ्लेक्स-फ्यूल) वाहन बेड़ा और गन्ने से बने इथेनॉल का मजबूत इकोसिस्टम है।

विश्व स्तर पर गैसोलीन की कीमतें 20-30% तक बढ़ने के बावजूद ब्राजील में मार्च में गैसोलीन की कीमतें सिर्फ 5% ही बढ़ीं। लाखों ड्राइवर अब महंगे गैसोलीन की जगह 100% इथेनॉल भर रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिल रही है।

ब्राजील का ‘डुअल-फ्यूल’ मॉडल क्या है?

ब्राजील के लगभग 75-80% हल्के वाहन फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (FFV) हैं। ये गाड़ियां गैसोलीन और इथेनॉल के किसी भी मिश्रण (0% से 100% तक) पर चल सकती हैं।

हर पेट्रोल पंप पर álcool (शुद्ध इथेनॉल) उपलब्ध है। ड्राइवर रोजाना कीमत देखकर फैसला लेते हैं — जब इथेनॉल सस्ता होता है, तो वे उसे चुनते हैं।

सरकार गैसोलीन में 30% और डीजल में 15% बायोफ्यूल मिश्रण अनिवार्य करती है — दुनिया में सबसे ऊंचा अनुपात।

1975 में तेल संकट के दौरान शुरू हुए Pró-Álcool कार्यक्रम ने इस मॉडल की नींव रखी। 2003 में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के आने के बाद यह क्रांति बन गया।

वर्तमान संकट में फायदा

ईरान युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने और कीमतें बढ़ने पर ब्राजील के मिल्स ने चीनी उत्पादन घटाकर अधिक इथेनॉल उत्पादन बढ़ा दिया। 2026/27 सीजन में इथेनॉल उत्पादन में 40 अरब लीटर (लगभग 10%) की बढ़ोतरी की उम्मीद है। इससे इथेनॉल की भरपूर आपूर्ति बनी रही और कीमतें नियंत्रण में रहीं।

UNICA (ब्राजीलियन शुगरकेन एंड बायोएनर्जी एसोसिएशन) के अध्यक्ष एवांड्रो गुस्सी ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल बेड़ा और इथेनॉल सरप्लस ने देश को तेल शॉक से बचाया है, जबकि कई विकसित देश संघर्ष कर रहे हैं।

क्यों है यह मिसाल?

ऊर्जा सुरक्षा: तेल आयात पर निर्भरता कम हुई।

पर्यावरण फायदे: इथेनॉल गैसोलीन से कम प्रदूषण फैलाता है।

कृषि अर्थव्यवस्था: गन्ने के किसानों को अच्छी आमदनी, ग्रामीण विकास को बढ़ावा।

कई देश (खासकर भारत) अब ब्राजील मॉडल को अपना रहे हैं — फ्लेक्स-फ्यूल वाहन और उच्च इथेनॉल ब्लेंडिंग पर ध्यान दे रहे हैं।

ब्राजील का यह मॉडल दिखाता है कि सही नीति, तकनीक और कृषि-औद्योगिक एकीकरण से तेल संकट को अवसर में बदला जा सकता है। हालांकि कुछ चुनौतियां जैसे दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल (2G) का विस्तार और फूड vs फ्यूल बहस भी जारी हैं।

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