ईरान की अमेरिका को खुली चुनौती: Apple और Google समेत 18 बड़ी टेक कंपनियों पर साइबर हमले का खतरा
दुबई/तेहरान, 31 मार्च 2026: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब सैन्य ठिकानों से आगे निकलकर टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर तक पहुंच गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी टेक कंपनियों को सीधी चेतावनी दी है कि वह 1 अप्रैल से इन कंपनियों के क्षेत्रीय परिचालन को निशाना बनाएगी।
IRGC ने कुल 18 अमेरिकी कंपनियों की लिस्ट जारी की है, जिसमें Apple, Google, Microsoft, Tesla, Intel, IBM, Meta, Nvidia, Oracle, Palantir, Boeing समेत कई बड़ी फर्म शामिल हैं। ईरानी मीडिया (Tasnim News Agency) ने इसे “शत्रु की टेक्नोलॉजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर” बताया और कहा कि इन कंपनियों के ऑफिस, डेटा सेंटर और रिसर्च फैसिलिटी ईरान के वैध लक्ष्य हैं।
IRGC की चेतावनी में मुख्य बातें:
हमले 1 अप्रैल (कल) शाम 8 बजे तेहरान समय से शुरू हो सकते हैं।
हर “आतंकी कृत्य” या अमेरिकी-इजरायली हमले के बदले इन कंपनियों के यूनिट्स को नुकसान पहुंचाया जाएगा।
ईरान ने इन कंपनियों के कर्मचारियों को तुरंत इलाके छोड़ने की सलाह दी है।
हमले ड्रोन, साइबर अटैक या अन्य माध्यमों से हो सकते हैं। पहले से ही अमेज़न के डेटा सेंटर (बहरीन और UAE) पर ईरानी ड्रोन हमले हो चुके हैं।
लिस्ट में शामिल प्रमुख कंपनियां (रिपोर्ट्स के अनुसार):
Apple
Microsoft
Tesla
Intel
IBM
Meta (Facebook)
Nvidia
Oracle
Palantir
Boeing
Cisco
HP
Dell
और अन्य कंपनियां (कुल 18)।
ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां अमेरिका और इजरायल को सैन्य टेक्नोलॉजी, AI, क्लाउड सर्विसेज और इंटेलिजेंस सपोर्ट दे रही हैं, इसलिए अब ये “आर्थिक और साइबर युद्ध” का हिस्सा बन गई हैं।
विशेषज्ञों की राय:
साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान पहले से ही प्रो-ईरानी हैकर ग्रुप्स के जरिए US और गल्फ देशों में साइबर अटैक बढ़ा रहा है।
अमेज़न, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे कंपनियों के मिडिल ईस्ट डेटा सेंटर पहले ही खतरे में हैं, जो AI और क्लाउड सर्विसेज के लिए महत्वपूर्ण हैं।
अमेरिकी कंपनियां अब अपने साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल्स को मजबूत कर रही हैं।
यह धमकी मिडिल ईस्ट युद्ध के 32वें दिन आई है, जब पहले से ही होर्मूज स्ट्रेट, तेल टैंकर और सैन्य ठिकानों पर हमले हो रहे हैं। वैश्विक बाजारों में टेक शेयरों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
अभी तक कोई हमला रिपोर्ट नहीं हुआ है, लेकिन स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण है। अमेरिका और इजरायल ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
