राजनीति

छत्तीसगढ़ में सशस्त्र माओवाद का अंत: डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बताया सफलता का राज

छत्तीसगढ़ में सशस्त्र माओवाद का अंत: डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बताया सफलता का राज

रायपुर। छत्तीसगढ़ में दशकों से चले आ रहे सशस्त्र नक्सलवाद (माओवाद) को लगभग पूरी तरह समाप्त करने का बड़ा दावा किया है राज्य के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय 31 मार्च 2026 की डेडलाइन पर आज उन्होंने कहा कि राज्य अब “100 प्रतिशत सशस्त्र नक्सलवाद मुक्त” हो गया है। बचे हुए मुट्ठी भर कैडर भी जल्द मुख्यधारा में आ जाएंगे।

डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने पिछले दो वर्षों की लगातार कार्रवाइयों को सफलता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के सटीक और लक्षित ऑपरेशनों, बेहतर खुफिया जानकारी और बड़े नेताओं के सरेंडर ने नक्सली नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ दिया। शर्मा के अनुसार, “शीर्ष नेताओं के सरेंडर ने डोमिनो इफेक्ट पैदा किया, जिससे निचले स्तर के कैडर भी हिंसा छोड़ने को मजबूर हुए।”

प्रमुख आंकड़े (जनवरी 2024 से अब तक):

532 माओवादी मारे गए

2,004 गिरफ्तार

2,700 से अधिक ने आत्मसमर्पण किया

लगभग 1,100 हथियार बरामद (AK-47, INSAS, मशीन गन आदि शामिल)

कई पोलितब्यूरो, सेंट्रल कमिटी और स्पेशल जोनल कमिटी सदस्यों को मार गिराया या सरेंडर कराया गया

शर्मा ने जोर दिया कि यह सफलता अचानक नहीं आई, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति, तकनीकी खुफिया (इंटेलिजेंस) और बस्तर क्षेत्र पर फोकस्ड अभियान का नतीजा है। उन्होंने कहा कि पहले बस्तर में देश के कुल माओवादी ताकत का 75 प्रतिशत केंद्रित था, लेकिन अब सशस्त्र कैडर पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। केवल 15-20 बचे हुए लोग पुनर्वास की प्रक्रिया में हैं।

सरेंडर और पुनर्वास पर जोर

हाल ही में कुख्यात माओवादी कमांडर पापा राव समेत कई प्रमुख नक्सलियों ने सरेंडर किया। सरेंडर से पहले पापा राव ने डिप्टी सीएम विजय शर्मा से फोन पर बात भी की। सरकार न सिर्फ सुरक्षा अभियान चला रही है, बल्कि सरेंडर करने वालों को पुनर्वास और मुख्यधारा में जोड़ने पर भी जोर दे रही है।

डिप्टी सीएम ने चेतावनी भी दी कि शहरी नक्सलवाद पर नजर रखी जा रही है, लेकिन बस्तर में अब तेज विकास कार्य होंगे ताकि स्थानीय लोग बिना डर के जीवन यापन कर सकें।

यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक बताई जा रही है। सुरक्षा बलों की बहादुरी और सरकार की सख्त लेकिन पुनर्वास-उन्मुख नीति ने मिलकर नक्सल समस्या का बड़ा समाधान किया है।

नोट: कुछ रिपोर्ट्स में अभी भी सीमा क्षेत्रों (जैसे छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर) में थोड़ी गतिविधि का जिक्र है, लेकिन राज्य सरकार का दावा है कि सशस्त्र संगठित माओवाद छत्तीसगढ़ में समाप्त हो चुका है।

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