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दिल्ली की सांसें अभी भी जहरीली: NCAP के तहत मिले 80.65 करोड़ में खर्च सिर्फ 16 करोड़, प्रदूषण पर लगाम नहीं लगी

दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्र से मिले 80.65 करोड़ रुपये में से फरवरी 2026 तक सिर्फ 15.74 करोड़ रुपये (करीब 19.5%) ही खर्च हुए। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत जारी इस फंड का ज्यादातर हिस्सा अभी भी बिना इस्तेमाल के पड़ा हुआ है।

दिल्ली की सांसें अभी भी जहरीली: NCAP के तहत मिले 80.65 करोड़ में खर्च सिर्फ 16 करोड़, प्रदूषण पर लगाम नहीं लगी

राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या लगातार गंभीर बनी हुई है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से प्रदूषण कम करने के लिए दिए गए फंड का उपयोग बेहद कम हो रहा है। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, NCAP के अंतर्गत दिल्ली को कुल 80.65 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन फरवरी 2026 तक केवल 15.74 करोड़ रुपये (19.35 प्रतिशत) ही खर्च हो पाए।

यह आंकड़ा दिल्ली-एनसीआर में PM2.5 के स्तर को WHO की सीमा से कई गुना ऊपर रखे हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि फंड का कम उपयोग और मुख्य प्रदूषण स्रोतों (जैसे वाहन, उद्योग और पराली जलाना) पर पर्याप्त ध्यान न देने के कारण स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है।

फंड का उपयोग कहां हो रहा?

NCAP के तहत जारी धनराशि का बड़ा हिस्सा मुख्य रूप से सड़कों की धूल नियंत्रण पर खर्च हो रहा है, जैसे वॉटर स्प्रिंकलर्स और एंटी-स्मॉग गन लगाने में। हालांकि, PM2.5 जैसे घातक कणों पर फोकस अपेक्षाकृत कम है। कई अन्य शहरों ने भी फंड का सीमित उपयोग किया है, जबकि कुछ जगहों पर 80-100 प्रतिशत खर्च होने के बावजूद प्रदूषण स्तर नहीं घटा।

दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों पर सवाल उठ रहे हैं कि करोड़ों रुपये के फंड के बावजूद जमीन पर असर क्यों नहीं दिख रहा। पर्यावरणविदों का मानना है कि फंड का बेहतर और लक्षित उपयोग, साथ ही सख्त नीतियों की जरूरत है।

दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण एक लंबी लड़ाई है, जिसमें फंड के अलावा क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग की मजबूती भी अहम भूमिका निभाती है।

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