जंग की आहट और आर्थिक पाबंदियां: ईरान के शोरूम्स में धूल फांक रही हैं रोल्स-रॉयस और फेरारी
तेहरान की सड़कों पर जहाँ कभी रफ़्तार और रुतबे का शोर होता था, वहाँ आज सन्नाटा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और आर्थिक प्रतिबंधों की दोहरी मार ने ईरान के लग्जरी कार बाज़ार को एक ‘पार्किंग लॉट’ में तब्दील कर दिया है। पेश है एक विशेष रिपोर्ट:
जंग की आहट और आर्थिक पाबंदियां: ईरान के शोरूम्स में धूल फांक रही हैं रोल्स-रॉयस और फेरारी
तेहरान | 31 मार्च, 2026
ईरान के पॉश इलाकों, जैसे कि उत्तरी तेहरान के मॉडर्न शोरूम्स में आज एक अजीब सा मंजर है। कांच की ऊंची दीवारों के पीछे खड़ी करोड़ों की रोल्स-रॉयस (Rolls-Royce), चमकती फेरारी (Ferrari) और लैम्बोर्गिनी (Lamborghini) जैसी गाड़ियाँ अब खरीदारों का नहीं, बल्कि धूल साफ़ करने वालों का इंतज़ार कर रही हैं। इजरायल और ईरान के बीच मंडराते युद्ध के बादलों ने यहाँ की लग्जरी लाइफस्टाइल पर ब्रेक लगा दिया है।
1. खरीदार गायब, कीमतें आसमान पर
ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ की गिरती कीमत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से इन कारों की कीमतें आम आदमी की पहुंच से तो दूर, अमीरों के बजट से भी बाहर होती जा रही हैं।
* मुद्रा संकट: विदेशी मुद्रा की कमी के कारण कारों के पुर्जे (Spare Parts) मिलना नामुमकिन हो गया है।
* डर का माहौल: युद्ध की आशंका के चलते लोग निवेश करने के बजाय नकदी और सोना बचाने में जुटे हैं।
2. शोरूम बने ‘म्यूजियम’
तेहरान के एक डीलर के मुताबिक, “पिछले छह महीनों में एक भी सुपरकार की डिलीवरी नहीं हुई है। लोग शोरूम के बाहर खड़े होकर फोटो तो खिंचवाते हैं, लेकिन चेकबुक निकालने की हिम्मत किसी में नहीं है।” स्थिति यह है कि कई शोरूम मालिक अब इन कारों को ढक कर रखने को मजबूर हैं क्योंकि इनका मेंटेनेंस खर्च ही लाखों में जा रहा है।
3. आयात पर लगा कड़ा प्रतिबंध
ईरान सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए लग्जरी वस्तुओं के आयात पर कड़े नियम लागू कर दिए हैं। जो गाड़ियाँ पहले से शोरूम में मौजूद हैं, वे अब ‘डेड स्टॉक’ बन चुकी हैं।
* कस्टम ड्यूटी: नई कारों पर 100% से अधिक की ड्यूटी।
* रजिस्ट्रेशन: युद्ध जैसी स्थिति में सरकार ने लग्जरी कारों के नए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को बेहद जटिल बना दिया है।
4. काला बाज़ार और विलासिता का अंत
जहाँ एक तरफ आम जनता बुनियादी चीज़ों के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं इन कारों का खड़ा रहना ईरान के भीतर बढ़ते आर्थिक अंतर को भी दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो ये शोरूम पूरी तरह बंद हो सकते हैं।
विशेषज्ञ की राय: “ईरान में लग्जरी कारें अब स्टेटस सिंबल नहीं, बल्कि एक लायबिलिटी (बोझ) बन गई हैं। युद्ध की स्थिति में न तो इन्हें चलाने के लिए सड़कें सुरक्षित होंगी और न ही इन्हें बेचने के लिए बाजार बचेगा।”
यह स्थिति दिखाती है कि युद्ध केवल सरहदों पर नहीं लड़ा जाता, उसकी कीमत आलीशान शोरूम्स और देश की अर्थव्यवस्था को भी चुकानी पड़ती है।
