केदारनाथ यात्रा पर संकट के बादल: बदहाल हाईवे और कीचड़ से पटी सड़कें, क्या सुरक्षित होगी श्रद्धालुओं की राह?
केदारनाथ धाम के कपाट खुलने में अब एक महीने से भी कम समय बचा है, लेकिन मुख्य यात्रा मार्ग की बदहाली ने प्रशासन के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। गौरीकुंड हाईवे पर जगह-जगह गड्ढे, कीचड़ और लैंडस्लाइड जोन यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं।
केदारनाथ यात्रा पर संकट के बादल: बदहाल हाईवे और कीचड़ से पटी सड़कें, क्या सुरक्षित होगी श्रद्धालुओं की राह?
रुद्रप्रयाग: विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू होने वाली है, लेकिन बाबा के भक्तों के लिए डगर आसान नजर नहीं आ रही है। गौरीकुंड हाईवे के कई महत्वपूर्ण हिस्सों, जैसे देवीधार, खुमेरा और रामपुर बाजार में सड़कों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। हालिया बारिश ने राजमार्ग विभाग की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है।
प्रमुख समस्या वाले क्षेत्र और चुनौतियां
सड़क मार्ग पर कई ऐसे ‘ब्लैक स्पॉट’ बन गए हैं, जो यात्रा शुरू होते ही भारी जाम का कारण बन सकते हैं:
* खुमेरा और देवीधार: इन क्षेत्रों में सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त है। स्थानीय निवासी अंकित राणा का आरोप है कि बजट पहले ही स्वीकृत होने के बावजूद विभाग ने मार्च में काम शुरू किया, जो सरासर लापरवाही है।
* रामपुर बाजार (स्लाइडिंग जोन): स्थानीय निवासी संदीप रावत के अनुसार, यह जोन पिछले साल से ही सिरदर्द बना हुआ है। बारिश के बाद यहाँ जमा हुए कीचड़ ने छोटे और बड़े, दोनों वाहनों के लिए जोखिम पैदा कर दिया है।
* कीचड़ और गड्ढे: हाईवे पर कई जगहों पर भारी वाहन फंस रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों की दैनिक आवाजाही भी ठप हो गई है।
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश
क्षेत्रीय जनता का कहना है कि प्रशासन केवल कागजों पर तैयारियां कर रहा है। यदि यात्रा शुरू होने से पहले इन गड्ढों और स्लाइडिंग जोन का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो देश-विदेश से आने वाले हजारों तीर्थयात्रियों को घंटों लंबे जाम और दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है।
विभाग का क्या है पक्ष?
तमाम शिकायतों और जमीनी हकीकत के बीच, एनएच लोनिवि (NH PWD) खंड के अधिशासी अभियंता ओंकार पाण्डे का कहना है कि:
* केदारनाथ यात्रा की तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं।
* जिन स्थानों पर लैंडस्लाइड का खतरा अधिक है, वहां ट्रीटमेंट (उपचार) का कार्य किया जा रहा है।
* विभाग का लक्ष्य यात्रा शुरू होने से पहले मार्ग को सुगम और सुरक्षित बनाना है।
चेतावनी: जानकारों का मानना है कि यदि अगले 15 दिनों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो मानसून से पहले की बारिश यात्रा के शुरुआती चरण को पूरी तरह प्रभावित कर सकती है।
