होर्मुज संकट से निकले दो और भारतीय जहाज: 92,000 टन से ज्यादा LPG लेकर लौट रहे ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। युद्ध के संकट के बावजूद दो और भारतीय जहाज ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ सुरक्षित रूप से इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं।
यहाँ इस घटनाक्रम की पूरी रिपोर्ट दी गई है:
होर्मुज संकट से निकले दो और भारतीय जहाज: 92,000 टन से ज्यादा LPG लेकर लौट रहे ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’
ईरान और अन्य शक्तियों के बीच जारी संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट में फंसे भारतीय जहाजों की घर वापसी का सिलसिला जारी है। सोमवार को इन दोनों जहाजों ने सफलतापूर्वक इस स्ट्रेट को पार किया और अब इनके अगले 2-4 दिनों में भारतीय तट पर पहुंचने की उम्मीद है।
1. मिशन ‘घर वापसी’: जहाजों की स्थिति
ट्रैकिंग वेबसाइटों और शिपिंग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इन जहाजों की मौजूदा स्थिति इस प्रकार है:
* जग वसंत: इस जहाज पर 33 भारतीय नाविक सवार हैं। इसके 26 मार्च तक भारत पहुंचने की संभावना है।
* पाइन गैस: इस जहाज पर 27 भारतीय नाविक तैनात हैं और इसके 28 मार्च तक भारत पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
* रूट की जानकारी: होर्मुज पार करने से पहले ये दोनों जहाज ईरान के लारक और क्वेशम द्वीपों के बीच से गुजरे, जहाँ माना जा रहा है कि ईरानी अधिकारियों ने इनकी गहन जांच की थी।
2. ऊर्जा सुरक्षा: भारत की एक दिन की खपत का इंतजाम
इन दोनों जहाजों का सुरक्षित आना भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है:
* LPG की मात्रा: दोनों जहाजों पर कुल 92,612.59 टन LPG लदी है।
* महत्व: यह मात्रा भारत की एक दिन की कुल एलपीजी खपत के बराबर है। युद्ध के समय में इतनी बड़ी खेप का सुरक्षित पहुंचना घरेलू आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने में मदद करेगा।
3. अब तक की प्रगति और चुनौतियां
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से भारत सरकार और शिपिंग मंत्रालय लगातार अपने जहाजों को निकालने के प्रयास में जुटे हैं:
* सफलता: अब तक कुल 4 भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। पिछले हफ्ते ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ 92,700 टन LPG लेकर भारत पहुंचे थे।
* अभी भी फंसे जहाज: शिपिंग मिनिस्ट्री के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा के अनुसार, युद्ध शुरू होने के समय 28 जहाज वहां मौजूद थे। अब भी 20 जहाज होर्मुज में फंसे हुए हैं, जिनमें से 5 जहाजों पर LPG लदी है।
ईरान की जांच और कूटनीतिक पहलू
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान हर जहाज को अनुमति देने से पहले यह सुनिश्चित कर रहा है कि माल या जहाज का संबंध अमेरिका से न हो। भारत के साथ ईरान के स्थिर संबंधों के कारण भारतीय नाविकों और जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल पा रहा है।
अगला कदम: सरकार अब शेष 20 जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षित वापसी के लिए कूटनीतिक चैनलों का उपयोग कर रही है।
