Thursday, September 10, 2026
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राजस्थान ब्यूरोक्रेसी में ‘रिवॉल्विंग चेयर’ का दौर: जॉइनिंग से पहले ही बदल रहे आदेश

राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची हुई है। भजनलाल सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रशासनिक फेरबदल का दौर जारी है, लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है— “कुर्सी मिलने से पहले ही छिन जाना।”

यहाँ राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों के बीच मची इस उठा-पटक पर विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:

राजस्थान ब्यूरोक्रेसी में ‘रिवॉल्विंग चेयर’ का दौर: जॉइनिंग से पहले ही बदल रहे आदेश

1. ताजा मामला: एपीओ और वेटिंग का खेल

राजस्थान में पिछले कुछ हफ्तों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ अधिकारियों को एक मलाईदार पद पर तैनात किया गया, लेकिन कार्यभार संभालने (Joining) से पहले ही उनके तबादले के संशोधित आदेश जारी कर दिए गए।

* कारण: गलियारों में चर्चा है कि इसके पीछे ‘पॉलिटिकल वीटो’ और स्थानीय विधायकों का दबाव एक बड़ी वजह है।

* असर: अधिकारियों में असमंजस की स्थिति है कि वे वर्तमान पद पर बने रहें या नई जगह जॉइन करें।

2. आरएस (RAS) और आईएएस (IAS) अधिकारियों की लंबी लिस्ट

हाल ही में कार्मिक विभाग ने तबादलों की जो सूचियां जारी कीं, उनमें से कई नाम ‘होल्ड’ पर रख दिए गए हैं।

* सीनियर ब्यूरोक्रेसी: सचिवालय में तैनात कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन चंद दिनों में ही उन्हें बिना किसी ठोस कारण के ‘एपीओ’ (Awaiting Posting Orders) कर दिया गया।

* कलेक्टरों का फेरबदल: कई जिलों में कलेक्टरों की तैनाती के तुरंत बाद समीक्षा की जा रही है, जिससे फील्ड में काम कर रहे अधिकारियों के मनोबल पर असर पड़ रहा है।

3. ‘पॉवर सेंटर’ और समन्वय की कमी?

ब्यूरोक्रेसी के जानकारों का मानना है कि राजस्थान में फिलहाल दो-तीन अलग-अलग पॉवर सेंटर काम कर रहे हैं:

* मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO): जहाँ से नीतिगत फैसले हो रहे हैं।

* संगठन और विधायक: जिनका अपने क्षेत्रों में पसंदीदा अधिकारियों को लगाने का भारी दबाव है।

* सचिवालय का शीर्ष प्रबंधन: जो अनुभव और सिनियोरिटी के आधार पर संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

4. ब्यूरोक्रेसी में उठा-पटक के मुख्य बिंदु

| स्थिति | विवरण |

| तबादला एक्सप्रेस | एक ही पद पर महीने भर में तीन बार बदलाव। |

| APO का डर | काम अच्छा होने के बावजूद ‘पॉलिटिकल ट्यूनिंग’ न बैठने पर पद से हटाया जाना। |

| नई नियुक्तियां | सेवानिवृत्त अधिकारियों को सलाहकार पदों पर बिठाने से सेवारत अधिकारियों में नाराजगी। |

| जिलों का हाल | नए बने जिलों के अस्तित्व और वहां की प्रशासनिक कमान को लेकर अभी भी धुंधलका। |

5. विपक्ष का हमला

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस स्थिति को “प्रशासनिक अराजकता” बता रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार ब्यूरोक्रेसी को केवल अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल कर रही है, जिससे प्रदेश का विकास कार्य ठप पड़ा है।

निष्कर्ष

राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में यह अस्थिरता प्रशासन की गति को धीमा कर सकती है। कुर्सी संभालने से पहले ही कमान छिन जाने के डर से अधिकारी अब कोई भी बड़ा फैसला लेने से कतरा रहे हैं, जो अंततः आम जनता के काम और फाइलों की रफ्तार को प्रभावित कर रहा है।

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