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श्रीलंका पर मिडिल ईस्ट युद्ध की भारी मार! पेट्रोल-डीजल के दाम 400 रुपये लीटर के पार, लंबी कतारें और राशनिंग शुरू

श्रीलंका पर मिडिल ईस्ट युद्ध की भारी मार! पेट्रोल-डीजल के दाम 400 रुपये लीटर के पार, लंबी कतारें और राशनिंग शुरू

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध (खासकर US-इज़राइल vs ईरान संघर्ष) की वजह से ग्लोबल ऑयल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। Strait of Hormuz जैसा महत्वपूर्ण रूट प्रभावी रूप से बंद होने से क्रूड ऑयल की कीमतें $112 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसकी सीधी मार श्रीलंका पर पड़ी है, जहां पेट्रोलियम आयात कुल आयात का करीब 25% है।

Ceylon Petroleum Corporation (CPC) ने रविवार (21 मार्च 2026) को ईंधन की कीमतों में 25% तक की भारी बढ़ोतरी की घोषणा की — यह दो हफ्तों में दूसरी बढ़ोतरी है। अब स्थिति यह है:

रेगुलर पेट्रोल (Octane 92): 317 रुपये से बढ़कर 398 रुपये प्रति लीटर

डीजल (Auto Diesel): भारी वृद्धि के बाद 382 रुपये प्रति लीटर (कुछ रिपोर्ट्स में 400+ तक पहुंचने की बात)

सुपर डीजल: कुछ वेरिएंट में 421-443 रुपये तक

95 ऑक्टेन पेट्रोल: 420-455 रुपये के आसपास

कई रिपोर्ट्स में आम इस्तेमाल वाले पेट्रोल और डीजल के दाम 400 रुपये लीटर के पार पहुंच चुके हैं, जो श्रीलंका के इतिहास में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले मार्च की शुरुआत में 8-10% की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन अब युद्ध की वजह से कीमतें 35-40% तक उछल चुकी हैं (फरवरी के मुकाबले)।

क्या हो रहा है श्रीलंका में?

पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं, लोग पैनिक बाइंग कर रहे हैं।

सरकार ने फ्यूल राशनिंग लागू कर दी है — प्राइवेट वाहनों के लिए साप्ताहिक कोटा (जैसे 15-25 लीटर पेट्रोल)।

स्कूलों में 4-डे वीक शुरू, पब्लिक सेक्टर में कामकाज कम, पब्लिक इवेंट्स रद्द।

प्रेसिडेंट अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा है कि देश को लंबे समय तक चलने वाले मिडिल ईस्ट संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा।

यह संकट श्रीलंका के लिए 2022 के आर्थिक संकट की याद दिला रहा है, जब फ्यूल की कमी से देश ठप हो गया था। अभी स्टॉक 30-35 दिनों के हैं, लेकिन अगर युद्ध लंबा चला तो स्थिति और खराब हो सकती है। एशिया के कई देशों में भी कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन श्रीलंका सबसे ज्यादा प्रभावित दिख रहा है क्योंकि वह पहले से ही रिकवरी फेज में था।

ट्रांसपोर्ट, खेती और रोजमर्रा की जिंदगी पर भारी असर पड़ रहा है। आम आदमी की जेब पर तगड़ा बोझ, और आने वाले दिनों में और बढ़ोतरी की आशंका!

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