भारत के लिए बड़ी राहत! ईरान में होर्मुज स्ट्रेट से LPG लादकर सुरक्षित निकला VLGC शिवालिक जहाज – संकट से निपटने में मदद मिलेगी
भारत के लिए बड़ी राहत! ईरान में होर्मुज स्ट्रेट से LPG लादकर सुरक्षित निकला VLGC शिवालिक जहाज – संकट से निपटने में मदद मिलेगी
नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर तनाव के बावजूद भारत को बड़ी खुशखबरी! VLGC शिवालिक (Very Large Gas Carrier Shivalik) नाम का भारतीय जहाज ईरान से LPG (Liquefied Petroleum Gas) लादकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट से निकल आया है। ये जहाज अब भारत की ओर बढ़ रहा है, और इसकी सफल निकासी से घरेलू LPG सप्लाई में राहत मिलने की उम्मीद है।
क्या हुआ ठीक-ठीक?
ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली के हालिया बयान (“भारत दोस्त है, सुरक्षित रास्ता देंगे”) के बाद ये पहला बड़ा सफल ट्रांजिट है।
भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों (एस. जयशंकर और अब्बास अराघची) के बीच हाल की बातचीत से भारत-फ्लैग्ड जहाजों को स्पेशल सेफ पैसेज मिला।
VLGC शिवालिक जैसे Very Large Gas Carriers ईरान (या गल्फ पोर्ट्स) से LPG लोड करते हैं – ये जहाज 70,000-80,000 MT तक LPG कैरी कर सकते हैं, जो भारत की घरेलू जरूरतों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट्स (Bloomberg, Reuters, Economic Times) के मुताबिक, 20+ भारतीय टैंकर (LPG, क्रूड, LNG) होर्मुज में फंसे थे – अब धीरे-धीरे निकल रहे हैं। 10 LPG टैंकर IOCL और HPCL जैसे रिफाइनर्स के लिए हैं।
ये निकासी 90% से ज्यादा LPG इंपोर्ट होर्मुज से आने के कारण बड़ी राहत है (Petroleum Ministry के अनुसार)।
क्यों है ये बड़ी खबर?
युद्ध से होर्मुज में ट्रैफिक लगभग रुक गया था – कई जहाज अटक गए, जिससे भारत में LPG संकट गहराया (घरेलू और कमर्शियल दोनों)।
फ्यूल चार्ज बढ़े (IndiGo, Air India), कतारें लगीं, लेकिन अब सप्लाई चेन सुधर सकती है।
ईरान ने भारत को “दोस्त” बताकर स्पेशल ट्रीटमेंट दिया – जबकि US, इजरायल और उनके सहयोगी जहाजों पर सख्ती है।
अन्य देशों (बांग्लादेश, चीन) को भी कुछ राहत मिली, लेकिन भारत की डिप्लोमेसी सबसे सफल रही।
आगे क्या?
अगर और जहाज सुरक्षित निकले तो LPG की कमी जल्द खत्म हो सकती है – घरेलू सिलेंडर डिलीवरी नॉर्मल हो जाएगी।
लेकिन युद्ध लंबा चला तो तेल कीमतें ($70-100 बैरल) पर दबाव रहेगा – फिच रेटिंग्स ने भी चेतावनी दी है।
सरकार ने कहा: “हमारी डिप्लोमेसी काम कर रही है, घबराएं नहीं।”
ये भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बड़ा पॉजिटिव डेवलपमेंट है! क्या आपको लगता है ये डिप्लोमेसी की जीत है या ईरान का स्मार्ट मूव? कमेंट में बताएं।
