राहुल गांधी बोले- नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री की तरह नहीं, बल्कि अमेरिका के हितों के लिए काम कर रहे
राहुल गांधी बोले- नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री की तरह नहीं, बल्कि अमेरिका के हितों के लिए काम कर रहे
कम्प्रोमाइज करना मोदी के संगठन की पुरानी आदत- राहुल गांधी
भागीदारी के मुद्दे पर बोले- इंटरव्यू दलित, पिछड़े और आदिवासी युवाओं को नौकरी पर न रखने का माध्यम बना, पब्लिक सेक्टर में उन्हें पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा
लखनऊ में कांशीराम जी को उनकी जयंती के अवसर पर दी श्रद्धांजलि, प्रशंसा की
संविधान सम्मेलन में सर्वसम्मति से पास हुआ कांशीराम को भारत रत्न देने का प्रस्ताव
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री की तरह नहीं, बल्कि अमेरिका के हितों के लिए काम कर रहे हैं। जब वह यह बात संसद में कहने जा रहे थे तो प्रधानमंत्री भाग निकले, क्योंकि वह आंख से आंख नहीं मिला सकते।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी शुक्रवार शाम को उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दिग्गज नेता कांशीराम की जयंती के अवसर पर आयोजित संविधान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कांशीराम जी के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें भारत रत्न देने की मांग करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव भी पारित किया गया।
मोदी सरकार की विफल विदेश नीति पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दबाव में हैं और वही कर रहे हैं जो वह कह रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने अडानी पर केस कर दिया है, जो वास्तव में भाजपा के खिलाफ मामला है, क्योंकि अडानी की कंपनी ही भाजपा का वित्तीय ढांचा है। इसी के जरिए प्रधानमंत्री मोदी को ब्लैकमेल किया जा रहा है कि अमेरिका की बात नहीं मानी तो भाजपा की पूरी वित्तीय व्यवस्था का खुलासा कर दिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में है और वे एपस्टीन के दोस्त रहे हैं। साथ ही, हरदीप पुरी की बेटी की कंपनी में जॉर्ज सोरोस का पैसा लगा है। जब उन्होंने गुरुवार को यह बात संसद में उठानी चाही, तो स्पीकर ने उन्हें रोक दिया।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि चार महीनों से अटके व्यापार समझौते को उनके संसद में दिए भाषण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अंतिम रूप दे दिया। उन्होंने कहा कि मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया और एपस्टीन फाइलों और अडानी केस के दबाव के कारण अमेरिका की शर्तों पर सहमति जता दी, जिसके बाद ट्रंप ने समझौते की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी दबाव में नरेंद्र मोदी ने भारत का पूरा डेटा अमेरिका को सौंप दिया है, अमेरिका के किसानों के लिए भारतीय बाजार पूरी तरह खोल दिया है और हर साल नौ लाख करोड़ रुपये का अमेरिकी सामान खरीदने का भी वादा किया है। उन्होंने कहा कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका के हाथों में सौंप दी गई है, अब अमेरिका तय करेगा कि भारत तेल-गैस कहां से खरीदेगा। इसी कारण देश में गैस की किल्लत हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समझौते में भारत को कुछ नहीं मिला, बल्कि टैरिफ बढ़ गए, जिससे व्यापारियों को बड़ा नुकसान होगा और कृषि क्षेत्र अमेरिका के लिए खुलने के कारण भारतीय किसान भी बुरी तरह प्रभावित होंगे।
सावरकर का नाम लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी जी, बाबा साहब आंबेडकर जी और कांशीराम जी ने मुश्किलें झेलीं, लेकिन कभी कम्प्रोमाइज्ड नहीं हुए। कम्प्रोमाइज्ड होना आरएसएस की विचारधारा से जुड़े लोगों की पुरानी आदत है।
अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस द्वारा अतीत में जिम्मेदारी निर्वहन में रह गई कमियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसी कारण कांशीराम जी सफल हुए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कांशीराम जी पंडित जवाहर लाल नेहरू के दौर में होते, वो कांग्रेस पार्टी से मुख्यमंत्री होते।
भागीदारी के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश की संस्थाओं जैसे न्यायपालिका, बड़ी कंपनियों के टॉप मैनेजमेंट, ब्यूरोक्रेसी और बड़े अस्पतालों व स्कूलों के प्रबंधन आदि में दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों की भागीदारी शून्य है। वहीं मनरेगा मजदूरों की सूची में देश की यह 85 प्रतिशत भरी मिलेगी। उन्होंने कहा कि आरएसएस के वरिष्ठ पदों पर भी पिछड़े, दलित और आदिवासी गायब हैं। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू के माध्यम से इन वर्गों के युवाओं को नौकरियों से दूर किया जा रहा है; पब्लिक सेक्टर में भी उन्हें पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा। उन्होंने कांग्रेस द्वारा देश में जाति जनगणना कराए जाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
राहुल गांधी ने कहा कि देश के संविधान में सावरकर या गोडसे की विचारधारा नहीं है, इसलिए प्रधानमंत्री इसे नहीं मानते। उन्होंने प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि वह मनोवैज्ञानिक रूप से हार चुके हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस एक गरीब पार्टी है और वह अमीर होना भी नहीं चाहती। अगर कांग्रेस अमीर पार्टी बन जाएगी तो वह भाजपा जैसी हो जाएगी। उन्होंने याद दिलाया कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बैंक खाते फ्रीज किए गए थे, लेकिन इससे पार्टी को फर्क नहीं पड़ा क्योंकि उसकी ताकत विचारधारा है, पैसा नहीं।
