उत्तराखंड

‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान का आगाज़: देहरादून में उमड़ी फरियादियों की भीड़, भूमि विवाद और पारिवारिक प्रताड़ना के मामले रहे हावी

‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान का आगाज़: देहरादून में उमड़ी फरियादियों की भीड़, भूमि विवाद और पारिवारिक प्रताड़ना के मामले रहे हावी

देहरादून: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के उपलक्ष्य में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके द्वार पर न्याय पहुँचाने के संकल्प के साथ उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने एक विशेष पहल की है। सोमवार, 9 मार्च को देहरादून से ‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया। जिला कोषागार स्थित सभागार में आयोजित इस पहले जनसुनवाई कार्यक्रम की अध्यक्षता आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने की।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं तक पहुँचना है जो अपनी शिकायतों को लेकर मुख्यालय तक नहीं आ पातीं। कार्यक्रम के दौरान न केवल महिलाओं की समस्याओं को सुना गया, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कई मामलों का मौके पर ही निस्तारण भी किया गया।

1. जनसुनवाई का सांख्यिकीय विवरण

अभियान के पहले दिन कुल 25 फरियादियों ने अपनी व्यथा आयोग के सम्मुख रखी। आयोग की अध्यक्ष ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करते हुए त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए। सुनवाई में मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों के मामले सामने आए:

* भूमि धोखाधड़ी (Land Fraud): सबसे अधिक मामले जमीन पर अवैध कब्जे और फर्जी रजिस्ट्री से जुड़े थे।

* पारिवारिक उत्पीड़न: बहू-बेटे द्वारा बुजुर्गों को प्रताड़ित करने और घरेलू हिंसा के मामले।

* वैवाहिक विवाद: पति-पत्नी के बीच अलगाव और बच्चों की कस्टडी से जुड़े मुद्दे।

* पुरुषों की शिकायतें: आयोग के पास कुछ ऐसे पुरुष भी पहुँचे जो अपनी पत्नियों द्वारा प्रताड़ित किए जाने का दावा कर रहे थे।

2. प्रमुख मामले और उनकी पेचीदगियाँ

बुजुर्ग माता-पिता की बेबसी (बहू-बेटे का आतंक)

एक हृदयविदारक मामले में एक वृद्ध महिला ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि उनके बेटे ने गुपचुप शादी कर ली और अब बहू उनकी संपत्ति पर कब्जा करना चाहती है। बहू अपनी माँ और बहन के साथ मिलकर सास-ससुर के साथ मारपीट करती है। पीड़िता ने आयोग से गुहार लगाई कि वे अपने बेटे को संपत्ति से बेदखल करना चाहती हैं ताकि वे शांति से जी सकें।

भूमि धोखाधड़ी के जाल में फंसी महिलाएं

* विमला नौडियाल का मामला: 1980 में खरीदी गई ससुर की जमीन के बंटवारे में धोखाधड़ी का आरोप लगा। आरोप है कि उनके जेठ ने ससुर के हिस्से की जमीन एक महिला पुलिसकर्मी को बेच दी, जिसने अब विमला के हिस्से की 4 बिस्वा जमीन पर भी अवैध कब्जा कर लिया है। अध्यक्ष ने मामले की गंभीरता देखते हुए इसे एसडीएम विकासनगर को हस्तांतरित कर दिया।

* पूजा गैरोला की शिकायत: पूजा ने पिछले साल जमीन खरीदी थी, लेकिन निर्माण शुरू करते ही कुछ रसूखदार लोग कोर्ट का स्टे ऑर्डर लेकर आ गए। डीएम कार्यालय के चक्कर काटने के बाद वे उम्मीद लेकर आयोग पहुँचीं।

सरकारी भूमि और अवैध वसूली

चार बच्चों की एक विधवा माँ ने शिकायत की कि वह नगर निगम की भूमि पर कच्चा घर बनाकर रह रही है, लेकिन कुछ स्थानीय दबंग वहां रहने के बदले उससे अवैध वसूली कर रहे हैं। इस पर अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन खाली करनी होगी, लेकिन अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ तत्काल पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए।

3. ‘रिवर्स विक्टिम’: जब पुरुष पहुँचे महिला आयोग

जनसुनवाई में एक दिलचस्प और गंभीर पहलू तब सामने आया जब कुछ पुरुष भी अपनी पत्नियों के खिलाफ शिकायत लेकर पहुँचे:

* एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी चार बच्चों को छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति के साथ चली गई है और अब उसे झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर ब्लैकमेल कर रही है।

* एक अन्य पीड़ित ने बताया कि उसकी पत्नी ने उस पर जानलेवा हमला करवाया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। वह अपने बच्चों से भी नहीं मिल पा रहा है। आयोग ने इन मामलों में काउंसलिंग का सुझाव दिया है।

4. आयोग का आगामी रोडमैप

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह अभियान उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में चलाया जाएगा।

“हमारा लक्ष्य न्याय को सुलभ बनाना है। 9 मार्च से शुरू हुआ यह सिलसिला 13 मार्च तक प्रदेश के हर जिले में पहुँचेगा। हमने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश दिए हैं ताकि फरियादियों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। विशेषकर लैंड फ्रॉड के मामलों में हम जिला प्रशासन के साथ मिलकर सख्त रुख अपनाएंगे।”

अभियान की मुख्य विशेषताएं:

| विवरण              | जानकारी |

| अभियान का नाम | महिला आयोग आपके द्वार |

| शुभारंभ तिथि | 9 मार्च, 2026 |

| अंतिम तिथि | 13 मार्च, 2026 |

| मुख्य फोकस | त्वरित निस्तारण, विधिक सहायता, ऑन-                          स्पॉट काउंसलिंग

| सहभागी विभाग | पुलिस प्रशासन, राजस्व विभाग                                   (SDM/Tehsildar),समाज कल्याण

यह पहल राज्य में महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जिससे तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।

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