ईरान की महिला फुटबॉल टीम क्यों बनी कट्टरपंथियों के निशाने पर? राष्ट्रगान साइलेंट प्रोटेस्ट के बाद ‘देशद्रोही’ का ठप्पा
ईरान की महिला फुटबॉल टीम क्यों बनी कट्टरपंथियों के निशाने पर? राष्ट्रगान साइलेंट प्रोटेस्ट के बाद ‘देशद्रोही’ का ठप्पा
ईरान की महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम पर कट्टरपंथी तत्वों और राज्य मीडिया का गुस्सा इन दिनों चरम पर है। वजह है—ऑस्ट्रेलिया में चल रहे 2026 AFC Women’s Asian Cup के उद्घाटन मैच में टीम ने राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया। यह साइलेंट प्रोटेस्ट ईरान में महिलाओं के अधिकारों, अनिवार्य हिजाब और हाल के युद्ध/संकट के खिलाफ एक बड़ा संकेत माना गया, जिसके बाद राज्य टीवी ने उन्हें “युद्धकालीन देशद्रोही” (wartime traitors) करार दिया।
क्या हुआ था?
3 मार्च 2026 को गोल्ड कोस्ट (ऑस्ट्रेलिया) में साउथ कोरिया के खिलाफ मैच से पहले ईरानी खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान के दौरान चुप्पी साध ली।
कोच मारजियेह जाफारी सहित पूरी टीम ने गाना नहीं गाया—यह ईरान की महिलाओं के लंबे समय से चल रहे विरोध (जैसे महसा अमीनी मामले से शुरू) का प्रतीक था।
ईरान में अनिवार्य हिजाब, लंबी आस्तीन और पैंट पहनकर खेल रही टीम ने इस मौके पर अपनी आवाज बुलंद की।
कट्टरपंथियों का हमला क्यों?
ईरानी राज्य टीवी (IRIB) के कट्टरपंथी प्रस्तुतकर्ता मोहम्मद रजा शाहबाजी ने वीडियो में कहा: “युद्ध के समय में देशद्रोहियों को और सख्ती से निपटना चाहिए। राष्ट्रगान न गाना देश के खिलाफ कदम है, इसे ‘धोखे और अपमान’ की चरम सीमा बताया।”
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कदमों को “कड़ी सजा” मिलनी चाहिए, क्योंकि ईरान अमेरिका-इजरायल के हमलों से युद्ध में है (अली खामेनेई की मौत के बाद)।
IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) से जुड़े कट्टर तत्व इसे “देशद्रोह” मानते हैं, क्योंकि राष्ट्रगान इस्लामिक रिपब्लिक का प्रतीक है। महिलाओं का विरोध ईरान के हार्डलाइनरों के लिए सबसे बड़ा खतरा है—यह 2022 के “Woman, Life, Freedom” आंदोलन से जुड़ा है।
परिणाम और खतरा
टीम पर परिवारों को धमकियां, फोन टैपिंग, होटल में निगरानी और वापसी पर जेल/मृत्युदंड का डर।
बाद के मैचों (ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ) में खिलाड़ियों ने जबरदस्ती राष्ट्रगान गाया और सलामी दी—संभवतः सुरक्षा बलों के दबाव में।
ऑस्ट्रेलिया में प्रदर्शनकारियों ने टीम को “रेजीम के बंधक” बताया, असाइलम की मांग की। FIFPRO, FIFA और AFC से सुरक्षा की अपील हुई।
कुछ रिपोर्ट्स में खिलाड़ियों के बस से SOS सिग्नल दिखाए जाने का दावा।
यह घटना ईरान में महिलाओं की स्थिति को फिर उजागर करती है—खेल के मैदान पर भी वे विरोध की आवाज उठा रही हैं, लेकिन कट्टरपंथी इसे राष्ट्र-विरोधी मानकर दबाने पर तुले हैं। युद्ध और राजनीतिक संकट के बीच यह प्रोटेस्ट महिलाओं की बहादुरी का प्रतीक बन गया है, लेकिन उनके लिए खतरा बहुत बड़ा है।
