कोरिया में शुरू हुआ US-South Korea का बड़ा सैन्य अभ्यास ‘Freedom Shield 2026’: उत्तर कोरिया के खतरे के बीच 11 दिन चलेगा
कोरिया में शुरू हुआ US-South Korea का बड़ा सैन्य अभ्यास ‘Freedom Shield 2026’: उत्तर कोरिया के खतरे के बीच 11 दिन चलेगा
आज (9 मार्च 2026) से दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने अपना वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास Freedom Shield 2026 शुरू कर दिया है। यह अभ्यास 19 मार्च तक चलेगा और इसमें हजारों सैनिक शामिल होंगे। दक्षिण कोरिया के संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बताया कि लगभग 18,000 दक्षिण कोरियाई सैनिक इसमें भाग लेंगे, जबकि अमेरिकी और अन्य संयुक्त राष्ट्र कमांड (UNC) सदस्य देशों के सैनिक भी शामिल हैं।
यह अभ्यास उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु और मिसाइल खतरे के बीच हो रहा है, जहां किम जोंग उन ने हाल में अमेरिका को “सबसे शत्रुतापूर्ण दुश्मन” करार दिया है। उत्तर कोरिया इन अभ्यासों को “आक्रमण की पूर्वाभ्यास” मानता है और इन्हें बहाना बनाकर अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाता है। हालांकि, अमेरिका और दक्षिण कोरिया इसे पूरी तरह रक्षात्मक (defensive) बताते हैं, जिसका उद्देश्य संयुक्त रक्षा क्षमता मजबूत करना और युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल (OPCON) को दक्षिण कोरिया को सौंपने की तैयारी है।
अभ्यास की मुख्य बातें क्या हैं?
अवधि: 9 मार्च से 19 मार्च 2026 (कुल 11 दिन)।
मुख्य फोकस: संयुक्त, संयुक्त, सभी डोमेन (जमीन, हवा, समुद्र, साइबर) ऑपरेशंस; हाल के वैश्विक संघर्षों (जैसे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी युद्ध) से सीखे सबकों को शामिल किया गया।
फील्ड ट्रेनिंग: Warrior Shield के तहत कुल 22 बड़े फील्ड मैन्यूवर होंगे, जो पिछले साल से लगभग आधे हैं (स्केल को लेकर दोनों देशों में कुछ मतभेद थे)।
भागीदारी: दक्षिण कोरिया, अमेरिका, UNC सदस्य देश; न्यूट्रल नेशंस सुपरवाइजरी कमीशन (NNSC) निगरानी करेगा।
विशेष: अभ्यास में वास्तविक खतरे, जटिल परिदृश्य और इंटरऑपरेबिलिटी पर जोर।
यह अभ्यास पिछले सालों की तरह ही बड़ा है, लेकिन इस बार अमेरिका के मिडिल ईस्ट (ईरान संघर्ष) में व्यस्त होने के बावजूद इसे प्रभावित नहीं किया गया। दक्षिण कोरिया में कुछ विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं, जहां लोग इन अभ्यासों और अमेरिकी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया की उम्मीद
पिछले पैटर्न के अनुसार, उत्तर कोरिया इन अभ्यासों के दौरान मिसाइल टेस्ट या अन्य प्रदर्शन कर सकता है। दोनों देशों ने कहा है कि अभ्यास रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए है, न कि आक्रामक।
यह अभ्यास इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति को और गर्म कर सकता है, खासकर जब वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ रहा है।
