मिडिल ईस्ट में महायुद्ध: 7 दिन, 14 देश शामिल, लाखों प्रभावित… अब तक की पूरी तबाही
मिडिल ईस्ट में पिछले 7 दिनों से एक ऐसी जंग छिड़ी हुई है, जिसने पूरे क्षेत्र को आग में झोंक दिया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त एयरस्ट्राइक्स में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष अब 7वें दिन में प्रवेश कर चुका है। अब तक 14 देश सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से इस युद्ध में शामिल हो चुके हैं, और लाखों लोग विस्थापित, हजारों मारे गए और अरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है। तेल कीमतें 152 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर दिखने लगा है।
दिन-दर-दिन क्या हुआ?
दिन 1 (28 फरवरी 2026):
अमेरिका और इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स (नतांज, फोर्डो, अराक) और तेहरान के लीडरशिप कॉम्प्लेक्स पर बड़े पैमाने पर हमले किए। खामेनेई की मौत की खबर से ईरान में कोहराम मच गया। ईरान ने जवाब में इजरायल पर 300+ बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन अटैक किए।
दिन 2-3 (1-2 मार्च):
ईरान के समर्थित हिजबुल्लाह (लेबनान) और हूती (यमन) सक्रिय हुए। हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल पर 1,200+ रॉकेट दागे, जबकि हूतियों ने लाल सागर में अमेरिकी और ब्रिटिश जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। अमेरिका ने यमन पर 400+ एयरस्ट्राइक्स किए। सीरिया में ईरानी ठिकानों पर इजरायली हमले बढ़े।
दिन 4 (3 मार्च):
ईरान ने बहरीन, UAE और सऊदी अरब के एयरबेस पर मिसाइल अटैक किए। सऊदी ने जवाब में ईरान के दक्षिणी तेल क्षेत्रों पर हमला किया। जॉर्डन और इराक ने अपने एयरस्पेस बंद कर दिए। तेल कीमतें 130 डॉलर पार कर गईं।
दिन 5 (4 मार्च):
तेहरान में भयंकर तबाही। अमेरिका-इजरायल ने आजादी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और अन्य सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए। ईरान में 1,200+ मौतें रिपोर्ट हुईं। इजरायल ने लेबनान के दक्षिणी इलाकों को खाली करने का आदेश दिया।
दिन 6 (5 मार्च):
इजरायल ने 50 फाइटर जेट्स से खामेनेई के अंडरग्राउंड मिलिट्री बंकर को पूरी तरह तबाह कर दिया। वीडियो जारी कर IDF ने दावा किया कि ईरानी कमांड सिस्टम अब कमजोर हो चुका है। ईरान ने क्लस्टर बॉम्ब्स से इजरायल पर जवाबी हमला किया।
दिन 7 (6 मार्च):
तेहरान में और हमले। इजरायल ने कहा कि ईरानी रेजिम अब “खात्मे की कगार” पर है। हिजबुल्लाह ने इजरायली नागरिकों को बॉर्डर से 5 किमी दूर रहने की चेतावनी दी। अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की छूट दी ताकि रूसी तेल आयात जारी रह सके।
शामिल देश (14):
इजरायल (मुख्य हमलावर)
अमेरिका (संयुक्त हमले)
ईरान (मुख्य लक्ष्य)
लेबनान (हिजबुल्लाह)
यमन (हूती)
सीरिया (ईरानी ठिकाने)
इराक (ईरानी मिलिशिया)
सऊदी अरब (जवाबी हमले)
UAE (एयरबेस टारगेट)
बहरीन (एयरबेस टारगेट)
जॉर्डन (एयरस्पेस बंद)
ब्रिटेन (हूतियों पर हमले में शामिल)
कतर (मध्यस्थता प्रयास)
तुर्की (सीरिया में सक्रिय, तटस्थ रहने की कोशिश)
तबाही का मंजर:
मौतें: ईरान में 1,200+, लेबनान में 800+, इजरायल में 400+, यमन में 600+ (अनुमानित)। कुल 3,000+ मौतें।
विस्थापित: लाखों लोग – तेहरान, बेरूत, सना से बड़े पैमाने पर पलायन।
आर्थिक नुकसान: तेल सप्लाई चेन टूटी, होर्मुज स्ट्रेट में खतरा। भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ा।
पर्यावरण: तेल क्षेत्रों में आग, प्रदूषण।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया:
रूस और चीन ने ईरान का समर्थन किया, जबकि अमेरिका-इजरायल गठबंधन मजबूत। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मिडिल ईस्ट में हालात “और कठिन” होंगे।
यह युद्ध अब रीजनल से ग्लोबल संकट बन चुका है। क्या बड़े पैमाने पर ग्राउंड ऑपरेशन होगा? या डिप्लोमेसी कामयाब होगी? दुनिया की नजरें तेहरान और तेल अवीव पर टिकी हैं।
