वृंदावन में परंपराओं की बेड़ियां तोड़कर विधवा माताओं ने खेली होली—गोपीनाथ मंदिर में रंग-फूलों से भरी खुशियां, सदियों पुरानी रूढ़ियां टूटीं!
वृंदावन में परंपराओं की बेड़ियां तोड़कर विधवा माताओं ने खेली होली—गोपीनाथ मंदिर में रंग-फूलों से भरी खुशियां, सदियों पुरानी रूढ़ियां टूटीं!
वृंदावन (मथुरा): होली 2026 के रंग आज वृंदावन में एक अलग ही मायने रख रहे हैं। जहां सदियों से विधवा महिलाओं को त्योहारों से दूर रखा जाता था और उन्हें ‘अशुभ’ मानकर सफेद साड़ी में जीवन बिताना पड़ता था, वहीं आज गोपीनाथ मंदिर परिसर में सैकड़ों विधवा माताओं ने परंपराओं की बेड़ियां तोड़कर जमकर होली खेली। यह नजारा दिल छू लेने वाला था—फूलों, गुलाल और अबीर से सजी महिलाएं नाच रही थीं, गा रही थीं और जीवन के रंग बिखेर रही थीं।
क्या हुआ आज?
गोपीनाथ मंदिर में 200 से अधिक विधवा महिलाएं एकत्र हुईं। वे फूलों की होली खेल रही थीं—गेंदे के फूल, गुलाब की पंखुड़ियां और हल्के रंगों से एक-दूसरे पर छिड़काव कर रही थीं।
कई महिलाओं ने देवकी नंदन महाराज या अन्य संतों के साथ भजन गाए, डांस किया और खुशी से झूम उठीं। 105 वर्षीय एक मां ने भी फूलों से होली खेली और कहा, “आज जीवन में रंग लौट आए।”
मैत्री घर (विधवा आश्रम) में भी अलग से फूलों की होली का आयोजन हुआ, जहां महिलाओं ने गुलाल उड़ाया और मुस्कान बिखेरी।
यह बदलाव NGO जैसे सुलभ इंटरनेशनल, स्थानीय संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रयासों से आया है, जो 2013 से विधवा होली की परंपरा को मजबूत कर रहे हैं। पहले सिर्फ फूल छिड़कने की अनुमति थी, अब खुलकर रंग खेलने की।
वृंदावन में विधवाओं की संख्या हजारों में है—वे अक्सर परिवारों द्वारा छोड़ दी जाती हैं और यहां भजन-कीर्तन से जीवन बिताती हैं। परंपरा के अनुसार, वे त्योहारों से दूर रहती थीं, लेकिन अब यह बदलाव महिला सम्मान और सामाजिक समावेश का प्रतीक बन गया है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं—लोग इसे “सच्ची होली” बता रहे हैं, जहां बुराई पर अच्छाई नहीं, बल्कि रूढ़िवादिता पर प्रेम और खुशी की जीत हुई। होली का यह रूप न सिर्फ रंगों का, बल्कि बदलाव का उत्सव है। वृंदावन की इन माताओं की मुस्कान ने पूरे ब्रज को रंगीन कर दिया!
