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ईरान-इजरायल जंग का नया मोड़: ईरान ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी अरामको रास तनुरा पर ड्रोन अटैक किया

ईरान-इजरायल जंग का नया मोड़: ईरान ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी अरामको रास तनुरा पर ड्रोन अटैक किया, ऑपरेशन बंद—तेल कीमतों में उछाल!

रियाद/तेहरान: ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग अब गल्फ के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच गई है। ईरान ने सोमवार (2 मार्च 2026) को सऊदी अरब की सबसे बड़ी और रणनीतिक तेल रिफाइनरी—अरामको रास तनुरा (Ras Tanura)—पर ड्रोन अटैक किया। यह हमला जंग के तीसरे दिन हुआ, जहां ईरान ने अमेरिका-इजरायल के हमलों का बदला लेने के लिए क्षेत्रीय तेल सुविधाओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

सऊदी डिफेंस मिनिस्ट्री और स्टेट मीडिया (SPA) के अनुसार, दो ईरानी ड्रोन (संभवतः Shahed-136 टाइप) रास तनुरा रिफाइनरी की तरफ आए, लेकिन सऊदी एयर डिफेंस ने उन्हें इंटरसेप्ट कर गिरा दिया। गिरे मलबे से रिफाइनरी में छोटी आग लगी, जिसे काबू में कर लिया गया। कोई मौत नहीं हुई, लेकिन सावधानी के तौर पर 550,000 बैरल प्रति दिन की क्षमता वाली इस रिफाइनरी के ऑपरेशन अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए। अरामको ने डैमेज असेसमेंट शुरू कर दिया है।

रास तनुरा सऊदी अरब की सबसे बड़ी डोमेस्टिक रिफाइनरी है और गल्फ कोस्ट पर स्थित है। यह क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट टर्मिनल के साथ जुड़ी है, जहां से यूरोप, एशिया (चीन, जापान, कोरिया) और भारत जैसे देशों को तेल जाता है। हमले से गैसोइल फ्यूचर्स में तेज उछाल आया है, जबकि वैश्विक तेल कीमतें पहले से ही 10%+ बढ़ चुकी हैं।

जंग का विस्तार क्यों?

ईरान ने इसे अमेरिका-इजरायल के हमलों (जिसमें सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हुई) का जवाब बताया है। ईरान ने अब गल्फ देशों (UAE, कुवैत, बहरीन, कतर, ओमान) और इजरायल के तेल-गैस फील्ड्स पर हमले बढ़ा दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ‘सिग्निफिकेंट एस्केलेशन’ है—गल्फ एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर अब ईरान के निशाने पर है, जिससे सऊदी और अन्य गल्फ स्टेट्स अमेरिका-इजरायल के साथ और करीब आ सकते हैं।

सऊदी अरब ने ईरानी राजदूत को तलब किया है और हमले की कड़ी निंदा की है। अमेरिका ने भी इसे ‘ईरान की आक्रामकता’ बताया। फिलहाल रिफाइनरी बंद होने से ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है—होर्मुज स्ट्रेट पहले से बंद है, अब रास तनुरा का असर तेल मार्केट पर और गहरा होगा। जंग का यह नया टारगेट वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दे सकता है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है—क्या सऊदी अब सीधे जंग में शामिल होगा?

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