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ईरान जंग का झटका: बासमती एक्सपोर्ट पर भारी असर, होर्मुज बंद से जहाज फंसे, भारत को क्या-क्या भेजता है ईरान?

नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका-इजरायल जंग ने अब भारत के बासमती चावल निर्यात को सीधा निशाना बना लिया है। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही ठप होने से ईरान जाने वाले जहाज फंस गए हैं, जिससे बासमती एक्सपोर्ट में भारी गिरावट आई है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने सदस्यों को सलाह दी है कि ईरान और गल्फ देशों के लिए नए CIF (कॉस्ट, इंश्योरेंस, फ्रेट) कॉन्ट्रैक्ट न लें, बल्कि FOB टर्म्स पर ही डील करें ताकि फ्रेट और इंश्योरेंस का रिस्क खरीदार पर रहे।

बासमती एक्सपोर्ट पर असर:

ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा बासमती मार्केट है (सऊदी अरब के बाद)। 2024-25 में भारत ने ईरान को करीब $1.2 बिलियन (लगभग ₹10,000 करोड़) का बासमती निर्यात किया, जो कुल बासमती एक्सपोर्ट का 25% है।

जंग शुरू होने के बाद से शिपमेंट्स लगभग रुक गए हैं। 2-4 लाख टन बासमती बंदर अब्बास पोर्ट पर फंसी हुई है, जबकि कई कंसाइनमेंट ट्रांजिट में अटके हैं।

बासमती की कीमतों में ₹400-500 प्रति क्विंटल (₹4-5 प्रति किलो) की गिरावट आई है, खासकर हरियाणा और पंजाब में जहां एक्सपोर्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

मिडिल ईस्ट (सऊदी, ईरान, इराक, यूएई, यमन) कुल बासमती एक्सपोर्ट का करीब 50% हिस्सा लेते हैं, जो ₹50,000 करोड़ का बाजार है। होर्मुज बंद होने से फ्रेट और इंश्योरेंस कॉस्ट में भारी उछाल आया है, जिससे एक्सपोर्टरों को नुकसान हो रहा है।

रामजान के पीक सीजन में डिमांड बढ़ती है, लेकिन अब स्टॉकिंग और पेमेंट में देरी से ट्रेड प्रभावित है।

भारत ईरान को क्या-क्या निर्यात करता है? (2024-25 के लेटेस्ट डेटा के अनुसार):

भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार करीब $1.68 बिलियन का है, जिसमें भारत का एक्सपोर्ट $1.24-1.25 बिलियन है। मुख्य निर्यात आइटम्स:

बासमती राइस (चावल): सबसे बड़ा आइटम, $698-747 मिलियन (करीब 60-70% एक्सपोर्ट का हिस्सा)।

सोयाबीन मील (Soybean Meal): $149 मिलियन (एनिमल फीड के लिए)।

केला (Bananas): $60-61 मिलियन।

चाय और मसाले (Tea, Coffee, Spices): $51-74 मिलियन।

फल-सब्जियां और नट्स (Edible Fruits, Nuts): $66 मिलियन।

फार्मास्यूटिकल्स और ड्रग्स: $24-25 मिलियन (और बढ़ रहा है)।

अन्य: शुगर, रेसिड्यूज/एनिमल फीडर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, मशीनरी पार्ट्स आदि।

ईरान से भारत मुख्य रूप से ऑर्गेनिक केमिकल्स, ड्राई फ्रूट्स (पिस्ता, बादाम, खजूर), एप्पल्स और पेट्रोलियम कोक आयात करता है, लेकिन ये बहुत कम हैं ($0.44 बिलियन)।

कुल मिलाकर: जंग लंबी चली तो बासमती एक्सपोर्टरों (खासकर पंजाब-हरियाणा) को बड़ा झटका लगेगा। घरेलू बाजार में कीमतें गिर सकती हैं, जबकि गल्फ देशों में स्टॉकिंग से शॉर्टेज का डर भी है। एक्सपोर्टर्स अब अफ्रीका या अन्य मार्केट्स की तरफ देख रहे हैं, लेकिन होर्मुज का असर वैश्विक शिपिंग पर भी पड़ रहा है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है—अगर स्ट्रेट जल्द खुला तो रिकवरी हो सकती है, वरना महंगाई और ट्रेड घाटे पर असर पड़ेगा!

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