यूजीसी नए नियमों के विरोध में जूना अखाड़े के साधुओं ने हरिद्वार से पदयात्रा शुरू की
यूजीसी नए नियमों के विरोध में जूना अखाड़े के साधुओं ने हरिद्वार से पदयात्रा शुरू की: मां गंगा पूजन के बाद दिल्ली के लिए रवाना, 8 मार्च को रामलीला मैदान में महाआंदोलन
हरिद्वार के सर्वानंद घाट से यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी यति नरसिम्हानंद गिरी के शिष्यों ने पदयात्रा शुरू की। रविवार को मां गंगा का विधि-विधान पूजन कर यात्रा की सफलता की कामना की गई और केंद्र सरकार से यूजीसी कानून वापस लेने की मांग की गई।
पूजन के बाद साधु-संत दिल्ली के रामलीला मैदान के लिए रवाना हो गए। इस दौरान श्री अखंड परशुराम अखाड़े के कार्यकर्ता और सवर्ण समाज के कई लोग मौजूद रहे। आचार्य संजय शास्त्री ने गंगा पूजन कराया।
श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा, “जो सवर्ण समाज के नेता यूजीसी को लेकर कुछ नहीं बोल पा रहे हैं, मां गंगा उन्हें सद्बुद्धि दे। जब तक सरकार यह काला कानून वापस नहीं लेती, विरोध का सिलसिला जारी रहेगा।”
महंत स्वामी यति रामस्वरूपानंद गिरी ने आरोप लगाया कि यूजीसी के नियमों में बदलाव कर सरकार ने सवर्ण समाज पर काला कानून थोपा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मां गंगा का आशीर्वाद लेकर पदयात्रा शुरू की गई है, जो कई पड़ाव पार कर 8 मार्च को दिल्ली पहुंचेगी और वहां जनसभा में हिस्सा लेगी।
महामंडलेश्वर महंत विश्व पुरी महाराज ने कहा, “एक तरफ एक संविधान और एक विधान की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ यूजीसी नियमों में बदलाव कर समाज को बांटने का काम किया जा रहा है। सरकार को भाईचारे और सद्भाव के लिए यूजीसी कानून वापस लेना चाहिए।”
गौरतलब है कि सवर्ण समाज के कई संगठन यूजीसी के इन नए नियमों का विरोध कर रहे हैं। 8 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में महा आंदोलन प्रस्तावित है, जहां कानून वापसी की मांग जोर-शोर से उठाई जाएगी। लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया जा रहा है।
यह पदयात्रा और आंदोलन सवर्ण समाज में बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।
