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सेंसेक्स 1000+ अंक लुढ़का, 5 लाख करोड़ का नुकसान: बाजार में अचानक क्यों आई भारी गिरावट?

आज 27 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स इंट्राडे में 1000+ अंकों तक गिरा और अंत में 961 अंक (1.17%) लुढ़ककर 81,287 पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी भी 318 अंक (1.25%) टूटकर 25,179 के नीचे बंद हुआ। इस गिरावट से निवेशकों की लगभग 5 लाख करोड़ रुपये (करीब 4.98-5.5 लाख करोड़) की संपत्ति एक दिन में स्वाहा हो गई। मार्केट कैप घटकर लगभग 463 लाख करोड़ पर आ गया।

मुख्य कारण: अचानक क्यों आई इतनी भारी गिरावट?

पाकिस्तान-अफगानिस्तान युद्ध की आशंका: पाकिस्तान और तालिबान (अफगानिस्तान) के बीच बढ़ते तनाव और हालिया ड्रोन हमलों-एयरस्ट्राइक्स से जियोपॉलिटिकल रिस्क बढ़ गया। निवेशक ‘रिस्क-ऑफ’ मोड में आ गए, जिससे बाजार पर भारी दबाव पड़ा। कई रिपोर्ट्स में इसे मुख्य ट्रिगर बताया गया।

विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली: FII ने पिछले कुछ दिनों में भारतीय शेयरों से पैसा निकाला। गुरुवार को ही ₹3,466 करोड़ की बिकवाली हुई, और आज भी जारी रही। यह निरंतर आउटफ्लो बाजार को नीचे खींच रहा है।

ग्लोबल अनिश्चितताएं और कमजोर संकेत: अमेरिका-ईरान न्यूक्लियर बातचीत बिना समझौते के खत्म हुई, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा। क्रूड ऑयल की कीमतें $71-72 के ऊपर बनी रहीं, जो भारत जैसे आयातक देश के लिए नकारात्मक है। साथ ही, US मार्केट्स में AI और टेक सेक्टर की कमजोरी (Nvidia, Nasdaq गिरावट) का असर एशियाई बाजारों पर पड़ा।

MSCI इंडेक्स रीबैलेंसिंग का प्रभाव: फरवरी 2026 के MSCI इंडेक्स रिव्यू से आज क्लोजिंग पर रीबैलेंसिंग हुई, जिससे अनुमानित $260 मिलियन (करीब ₹2,000 करोड़+) का नेट आउटफ्लो हुआ। इससे अंतिम घंटों में बिकवाली तेज हुई।

सेक्टोरल दबाव और टेक्निकल ब्रेकडाउन: रियल्टी, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो और FMCG सेक्टर सबसे ज्यादा टूटे (2%+ गिरावट)। निफ्टी 25,200 के नीचे और 200-डे EMA के नीचे बंद हुआ, जिससे टेक्निकल सेलिंग ट्रिगर हुई। IT सेक्टर में कुछ राहत मिली, लेकिन कुल मिलाकर ब्रॉड-बेस्ड सेलिंग रही।

बाजार का मूड और आगे क्या?

यह गिरावट फरवरी महीने की लगातार कमजोरी का हिस्सा है—निफ्टी IT इंडेक्स फरवरी में 19%+ गिरा, जो 2008 के बाद सबसे खराब महीना है। बाजार अब एक महीने के निचले स्तर पर है। निवेशक अब Q3 GDP डेटा (आज जारी) और ग्लोबल डेवलपमेंट्स पर नजर रखे हुए हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जियोपॉलिटिकल रिस्क कम होने तक volatility बनी रहेगी।

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