अन्तर्राष्ट्रीय

तालिबान ने लिया बदला: शहबाज शरीफ के दफ्तर के पास पाक सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले

पाकिस्तान और अफगानिस्तान (तालिबान शासन) के बीच तनाव अब खुले युद्ध के रूप में बदल गया है। 27 फरवरी 2026 को तालिबान ने दावा किया है कि उन्होंने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय के निकट इलाके भी शामिल हैं। यह हमला पाकिस्तान के हालिया एयरस्ट्राइक्स का जवाबी कार्रवाई बताया जा रहा है।

घटना का विवरण

अफगान तालिबान के रक्षा मंत्रालय और प्रवक्ताओं (जैसे जबीहुल्लाह मुजाहिद और अन्य) ने कहा कि उन्होंने ड्रोन से एयरस्ट्राइक सफलतापूर्वक अंजाम दी। लक्ष्य पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने, कमांड सेंटर और रणनीतिक स्थल थे।

हमलों में इस्लामाबाद के फैजाबाद इलाके को निशाना बनाया गया, जो प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय (या PMO) से महज 5-6 किलोमीटर दूर है। तालिबान ने इसे “पाकिस्तान की गर्दन पर हाथ” रखने जैसा प्रतीकात्मक संदेश दिया।

अन्य लक्ष्यों में नौशेरा (आर्टिलरी स्कूल), एबटाबाद, स्वाबी, जमरूद जैसे इलाकों के सैन्य पोस्ट शामिल बताए गए हैं।

तालिबान का दावा है कि इन हमलों में पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान हुआ, जिसमें 55 से अधिक सैनिक मारे गए।

पाकिस्तान का पक्ष

पाकिस्तानी सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने कहा कि ये ड्रोन हमले पाकिस्तानी तालिबान (TTP) के थे, जिन्हें अफगान तालिबान का समर्थन प्राप्त है। पाकिस्तान की एंटी-ड्रोन सिस्टम ने अधिकांश ड्रोनों को मार गिराया और कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।

पाकिस्तान ने इसे अफगान तालिबान और TTP के बीच सीधे लिंक का सबूत बताया।

पाकिस्तान ने पहले ऑपरेशन ग़ज़ब लिल हक़ (Righteous Fury) के तहत अफगानिस्तान के काबुल, कंधार, पक्तिया आदि पर एयरस्ट्राइक की थी, जिसमें सैकड़ों तालिबान लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया। पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसे “ओपन वॉर” घोषित किया।

पृष्ठभूमि

यह संघर्ष दुर्रानी लाइन (Durand Line) पर लंबे समय से चले आ रहे बॉर्डर विवाद, TTP के हमलों और पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक से तेज हुआ है। फरवरी 2026 में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में TTP और ISIS-K के ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में तालिबान ने बॉर्डर पर हमले तेज किए और अब ड्रोन से गहराई में पहुंचकर पलटवार किया।

दोनों पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे हैं—तालिबान सफलता का दावा कर रहा है, जबकि पाकिस्तान इसे असफल बता रहा है। स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान जैसे देश मध्यस्थता की पेशकश कर रहे हैं।

(नोट: यह जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक बयानों पर आधारित है; दोनों पक्षों के दावे परस्पर विरोधी हैं, इसलिए स्वतंत्र सत्यापन जरूरी है।)

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