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यूपी के शाहजहांपुर में ‘लाट साहब’ जुलूस की तैयारियां जोरों पर, मस्जिदों-मजारों को तिरपाल से ढका गया

यूपी के शाहजहांपुर में ‘लाट साहब’ जुलूस की तैयारियां जोरों पर, मस्जिदों-मजारों को तिरपाल से ढका गया

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में होली के मौके पर निकलने वाले पारंपरिक ‘लाट साहब’ (या ‘जूतामार होली’) जुलूस को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। जुलूस मार्ग पर पड़ने वाली मस्जिदों, मजारों और अन्य धार्मिक स्थलों को तिरपाल (ट्रिपाल) और मोटी प्लास्टिक शीट्स से ढक दिया गया है, ताकि जुलूस के दौरान उछाले जाने वाले रंग, जूते-चप्पल या अन्य चीजों से किसी तरह का नुकसान न हो और शांति बनी रहे।

मुख्य बातें:

संख्या: विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, जुलूस के रूट पर 48 मस्जिदों और मजारों को पूरी तरह ढका गया है (कुछ पुरानी रिपोर्ट्स में 67 या अधिक का जिक्र था, लेकिन इस साल 48 की पुष्टि ADM राजनीश कुमार मिश्रा ने की है)।

उद्देश्य: यह कदम मुख्य रूप से सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए उठाया गया है। जुलूस में लोग ‘लाट साहब’ (एक व्यक्ति को ब्रिटिश काल के लाट साहब की तरह तैयार कर भैंसा गाड़ी पर बिठाया जाता है) पर जूते, चप्पल, झाड़ू और रंग फेंकते हैं। इससे इबादतगाहों पर रंग या गंदगी पड़ने की आशंका रहती है, जिसे रोकने के लिए ढकाव किया जाता है।

सुरक्षा व्यवस्था:

जुलूस रूट पर 100+ सोलर CCTV कैमरे लगाए गए हैं।

200 से ज्यादा मजिस्ट्रेट और डेढ़ गुना अधिक पुलिस बल तैनात।

24 संवेदनशील स्थानों पर पहली बार पैरामिलिट्री फोर्स (PAC/अर्धसैनिक) की ड्यूटी।

कुल पुलिस बल: 4 ASP, 13 CO, 310 SI, 1200 कांस्टेबल और 500 होमगार्ड।

रूट को जोन में बांटा गया, गलियों में बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम।

‘लाट साहब’ जुलूस क्या है?

यह शाहजहांपुर की सैकड़ों साल पुरानी अनोखी परंपरा है, जो होली पर मनाई जाती है। इसमें ‘बड़ा लाट साहब’ और ‘छोटा लाट साहब’ के दो मुख्य जुलूस निकलते हैं। एक व्यक्ति को नग्न कर (या ढक कर) ‘लाट साहब’ बनाया जाता है, उसे भैंसा गाड़ी पर बिठाकर शहर घुमाया जाता है और लोग जूतों-झाड़ू से ‘मारते’ हैं—यह अंग्रेजी राज के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध का रूप माना जाता है। जुलूस लगभग 7-8 किमी लंबा होता है और काफी भीड़ जुटती है।

प्रशासन का कहना है कि यह परंपरा शांतिपूर्ण ढंग से निभाई जाए, इसलिए सभी सावधानियां बरती जा रही हैं। स्थानीय लोग और नेता भी इसकी सराहना कर रहे हैं कि प्रशासन ने पहले से तैयारी कर शांति सुनिश्चित की है।

फिलहाल, होली (2026 में मार्च की शुरुआत में) से पहले शहर में माहौल सामान्य है, लेकिन सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त हैं।

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