उत्तराखंड

होली पर जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क बंद: वन्यजीवों की शांति और सुरक्षा के लिए 3-4 मार्च को पूर्ण प्रतिबंध

होली पर जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क बंद: वन्यजीवों की शांति और सुरक्षा के लिए 3-4 मार्च को पूर्ण प्रतिबंध

जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने होली के मौके पर पर्यावरण संरक्षण, जंगली जानवरों की दिनचर्या में व्यवधान न आने और हुड़दंग रोकने के लिए सख्त कदम उठाया है। 3 और 4 मार्च 2026 को पार्क सहित सभी जुड़े पर्यटन जोन पर्यटकों के लिए पूर्ण रूप से बंद रहेंगे।

प्रशासन के अनुसार प्रमुख नियम और बंदी का विवरण:

3 मार्च (होली की पूर्व संध्या):

सुबह की जंगल सफारी निर्धारित समय पर चलेगी (जैसा पहले से बुक है)।

दोपहर की सफारी और नाइट स्टे पूरी तरह बंद रहेगा।

4 मार्च (होली का मुख्य दिन):

सुबह और शाम दोनों पालियों की जंगल सफारी बंद।

नाइट स्टे (रात्रि विश्राम) पर पूर्ण प्रतिबंध।

सभी पर्यटन गतिविधियां रुकेंगी।

5 मार्च से: सभी जोन में सफारी, नाइट स्टे और अन्य पर्यटन गतिविधियां सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी।

किन जोनों में बंदी लागू रहेगी?

ढिकाला, बिजरानी, ढेला, दुर्गादेवी, गिरिजा (मुख्य कॉर्बेट जोन)

रामनगर वन प्रभाग: सीतावनी, कोटा, कालाढूंगी

तराई पश्चिमी वन प्रभाग: फाटो, हाथी डगर

पार्क वार्डन बिंदर पाल सिंह का बयान:

“होली के दौरान रामनगर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। कुछ लोग उत्सव के नाम पर जंगल में शोर-शराबा, पटाखे, तेज संगीत और अनुशासनहीन व्यवहार करते हैं, जिससे बाघ, हाथी, हिरण और अन्य वन्यजीवों की दिनचर्या प्रभावित होती है। कई बार जानवर घायल भी हो जाते हैं। इसी कारण हर साल यह फैसला लिया जाता है। हमने पहले ही ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल पर 3-4 मार्च को अवकाश की सूचना अपलोड कर दी थी ताकि लोग अपनी यात्रा प्लान कर सकें।”

वन विभाग की अपील:

पर्यटक नियमों का पालन करें।

जंगल की संवेदनशीलता को समझें और सहयोग करें।

पटाखे, तेज आवाज, शराब और अनावश्यक भीड़ से दूर रहें।

यह फैसला वन्यजीव संरक्षण, पर्यटकों की सुरक्षा और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है। कॉर्बेट प्रशासन का कहना है कि होली के दौरान जंगल का प्राकृतिक संतुलन और शांति बनी रहे, यही सबसे बड़ा उद्देश्य है।

अगर आप 3-4 मार्च को कॉर्बेट घूमने की योजना बना रहे थे, तो यात्रा टाल दें या 5 मार्च के बाद का प्लान बनाएं। पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए यह कदम जरूरी है!

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