उत्तराखंड

उत्तराखंड में ‘हनी मिशन’ को नई उड़ान: सरकार जल्द लागू करेगी ‘बी कीपिंग पॉलिसी’

उत्तराखंड में ‘हनी मिशन’ को नई उड़ान: सरकार जल्द लागू करेगी ‘बी कीपिंग पॉलिसी’

देहरादून: उत्तराखंड सरकार राज्य को देश का प्रमुख शहद उत्पादन केंद्र बनाने के लिए कमर कस चुकी है। पर्यटन के साथ-साथ अब ‘हनी मिशन’ के जरिए राज्य की आर्थिकी को मजबूत करने की तैयारी है। वर्तमान में उत्तराखंड देश में शहद उत्पादन के मामले में आठवें स्थान पर है, जिसे शीर्ष पर लाने के लिए उद्यान विभाग एक व्यापक ‘बी कीपिंग पॉलिसी’ (Bee Keeping Policy) तैयार कर रहा है।

पॉलिसी के मुख्य आकर्षण और उद्देश्य

राज्य सरकार का मुख्य फोकस छोटे किसानों, सीमांत कृषकों और महिला स्वयं सहायता समूहों को मधुमक्खी पालन से जोड़ना है।

* वैल्यू चेन का निर्माण: शहद उत्पादन से लेकर उसकी प्रोसेसिंग और मार्केटिंग तक के लिए एक पूरी चैन बनाई जाएगी।

* प्रीमियम वैल्यू: ऑर्गेनिक शहद को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर प्रमाणित कर विश्व बाजार में ‘उत्तराखंड हनी’ की ब्रांडिंग की जाएगी।

* वैकल्पिक आय: जिन किसानों के पास परंपरागत खेती के लिए पर्याप्त भूमि नहीं है, उनके लिए मधुमक्खी पालन एक बेहतर विकल्प बनेगा।

दूसरे राज्यों की ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ अपनाएगा उत्तराखंड

पॉलिसी को आधुनिक और किसान-अनुकूल बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार अपने अधिकारियों और विशेषज्ञों की एक टीम उन राज्यों में भेजेगी जहाँ बागवानी और मधुमक्खी पालन में उत्कृष्ट कार्य हो रहे हैं। इस अध्ययन यात्रा का उद्देश्य अन्य राज्यों की सफल नीतियों और प्रक्रियाओं को समझकर उन्हें उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार लागू करना है।

किसानों को मिल रही हैं भारी सुविधाएं

वर्तमान में उद्यान विभाग के माध्यम से किसानों को निम्नलिखित लाभ दिए जा रहे हैं:

* 40% सब्सिडी: शहद उत्पादन के लिए ‘बी कॉलोनी बॉक्स’ पर 40 फीसदी की सब्सिडी दी जा रही है।

* प्रोत्साहन राशि: प्रशिक्षण के दौरान किसानों को ₹1000 प्रतिदिन की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जा रही है।

* बेहतर बाजार मूल्य: राज्य के किसान वर्तमान में उद्यान विभाग के जरिए ₹1200 प्रति किलो तक की दर से शहद बेच रहे हैं।

“उत्तराखंड का शहद ऑर्गेनिक और औषधीय गुणों के कारण विश्वभर में विशिष्ट पहचान रखता है। हम जल्द ही ‘बी कीपिंग पॉलिसी’ को कैबिनेट के समक्ष रखेंगे ताकि किसानों को शहद उत्पादन के साथ-साथ उसकी प्रोसेसिंग और सर्टिफिकेशन का भी सीधा लाभ मिल सके: एस.एन. पांडे, सचिव, उद्यान विभाग

ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन पर विशेष जोर

उत्तराखंड के पास पहले से ही ‘सीड एवं ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन बोर्ड’ मौजूद है। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के शहद को ‘ऑर्गेनिक सर्टिफाइड’ कर इसकी प्रीमियम ब्रांडिंग की जाए, जिससे किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर दाम मिल सकें।

 

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