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अंतरिक्ष में भारत का पहला डेटा सेंटर: 2026 के अंत तक लॉन्च, AI का खेल बदल देगा – NeevCloud और Agnikul Cosmos की क्रांतिकारी योजना

अंतरिक्ष में भारत का पहला डेटा सेंटर: 2026 के अंत तक लॉन्च, AI का खेल बदल देगा – NeevCloud और Agnikul Cosmos की क्रांतिकारी योजना

भारत अब अंतरिक्ष में अपना पहला AI डेटा सेंटर बनाने की दौड़ में शामिल हो गया है। चेन्नई स्थित स्पेस स्टार्टअप Agnikul Cosmos और बेंगलुरु की AI क्लाउड कंपनी NeevCloud ने मिलकर भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल AI डेटा सेंटर लॉन्च करने की घोषणा की है। यह प्रोजेक्ट लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में होगा और 2026 के अंत तक इसका पहला पायलट/प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट मिशन लॉन्च हो सकता है। सफल होने पर 2027 से कमर्शियल ऑपरेशंस शुरू होंगे, और अगले 3 साल में 600+ ऑर्बिटल एज डेटा सेंटर्स का नेटवर्क बन सकता है।

मुख्य हाइलाइट्स और फायदे:

कैसे बनेगा? Agnikul के 3D प्रिंटेड रॉकेट Agnibaan के एक्सटेंडेड अपर स्टेज (रॉकेट का ऊपरी हिस्सा) को NeevCloud का AI कंप्यूट प्लेटफॉर्म होस्ट करेगा। यह स्पेस में AI इन्फरेंसिंग (प्रोसेसिंग) के लिए इस्तेमाल होगा।

पावर और कूलिंग: पूरी तरह सोलर एनर्जी से चलेगा (अंतरिक्ष में अनलिमिटेड सूरज की रोशनी), और स्पेस की ठंडी वैक्यूम से फ्री रेडिएटिव कूलिंग मिलेगी – कोई बिजली बिल या AC की जरूरत नहीं!

फायदे:

डेटा ट्रांसफर टाइम सिर्फ 2.5 मिलीसेकंड (जमीन पर डेटा सेंटर्स से बहुत तेज)।

लागत में भारी कमी (पावर और कूलिंग पर 90%+ बचत)।

प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, भूकंप) से सुरक्षित।

सैटेलाइट इमेजरी को ऑर्बिट में ही प्रोसेस कर रियल-टाइम अलर्ट (जैसे जंगल की आग) भेजना – सिर्फ जरूरी डेटा धरती पर भेजा जाएगा, बैंडविड्थ बचाएगा।

तुलना: यह Elon Musk की SpaceX जैसी कंपनियों के स्पेस-बेस्ड कंप्यूटिंग आइडियाज से इंस्पायर्ड है, लेकिन भारत इसे प्राइवेट सेक्टर से आगे बढ़ा रहा है।

बैकग्राउंड:

घोषणा India AI Impact Summit 2026 (दिल्ली, भारत मंडपम) में हुई, जहां NeevCloud के फाउंडर/CEO ने मॉडल दिखाया।

यह भारत के AI इंफ्रास्ट्रक्चर को अगले लेवल पर ले जाएगा – AI प्रोसेसिंग तेज, सस्ती और सुरक्षित।

OpenAI CEO Sam Altman ने भारत की AI प्रोग्रेस की तारीफ की, लेकिन स्पेस डेटा सेंटर को “बेवकूफी” कहा (हालांकि प्रोजेक्ट प्राइवेट है)।

चुनौतियां:

लॉन्च, ऑर्बिट में स्थिरता, रेडिएशन प्रोटेक्शन, और स्पेस डेब्री।

लेकिन कंपनियां इसे “Made in India for the World” बता रही हैं – Agnikul का 3D प्रिंटेड रॉकेट इसे कम खर्चीला बनाएगा।

यह प्रोजेक्ट भारत को स्पेस और AI में ग्लोबल लीडर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। अगर सफल हुआ, तो टेक का खेल सचमुच बदल जाएगा!

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