‘कभी-कभी गुस्सा आ जाता है यार…’, औकात वाले बयान पर बोले कैलाश विजयवर्गीय: तेवर अब भी नरम नहीं, सीएम की माफी के बाद भी यही रुख
‘कभी-कभी गुस्सा आ जाता है यार…’, औकात वाले बयान पर बोले कैलाश विजयवर्गीय: तेवर अब भी नरम नहीं, सीएम की माफी के बाद भी यही रुख
भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विवादित बयान ने फिर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को सदन में “अपनी औकात में रहो” कहने के बाद अब विजयवर्गीय ने मीडिया से बातचीत में बड़े सहज अंदाज में कहा, “कभी-कभी गुस्सा आ जाता है यार… यह बहुत सामान्य बात है।” उन्होंने सीएम मोहन यादव द्वारा सदन में माफी मांगने पर भी पलटवार करते हुए कहा, “कप्तान हैं मुख्यमंत्री… उन्होंने माफी मांग ली तो क्या हो गया यार।”
क्या हुआ पूरा मामला?
गुरुवार को बजट सत्र में अडानी ग्रुप के साथ बिजली खरीद समझौते (1.25 लाख करोड़ रुपये के 25 साल के डील) पर तीखी बहस हुई।
उमंग सिंघार ने सरकार पर आरोप लगाए और सबूत पेश करने की बात कही।
विजयवर्गीय ने कहा, “प्रमाण रखो तो रखो,” और गुस्से में आकर सिंघार को “औकात में रहो” कह दिया।
इससे विपक्ष भड़क गया, वेल में आकर हंगामा किया, सदन 40 मिनट तक ठप रहा और आखिरकार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, “गुस्सा दिखना चाहिए, लेकिन शब्दों में नहीं आना चाहिए। आज पटवा जी याद आ गए।”
सीएम मोहन यादव ने सदन में सभी की तरफ से खेद जताया और माफी मांगी।
विजयवर्गीय का रुख अब भी सख्त
मीडिया से बात करते हुए विजयवर्गीय ने कोई पछतावा नहीं जताया। उन्होंने कहा:
“कई बार हो जाता है यार… बहुत सामान्य सी बात है।”
“उनका भी एक अंदाज है यार… कभी-कभी गुस्सा आ ही जाता है।”
“मुख्यमंत्री कप्तान हैं, माफी मांग ली तो क्या हुआ।”
उन्होंने सिंघार की बॉडी लैंग्वेज पर भी सवाल उठाए और कहा कि ये पहली बार हुआ जब सदन में गुस्सा आया।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस ने इसे BJP के घमंड का प्रतीक बताया। पार्टी प्रदेश भर में विजयवर्गीय का पुतला जलाने और 1,000+ ब्लॉक्स में प्रदर्शन की योजना बना रही है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, “अडानी पर मिर्ची लग गई है, इसलिए गुस्सा आया।”
सियासी असर
ये घटना MP में BJP सरकार की छवि पर सवाल उठा रही है, खासकर जब हाल ही में विजयवर्गीय के अन्य विवादित बयान (जैसे ‘घंटा’ वाला) भी सुर्खियां बटोर चुके हैं। विपक्ष इसे “सत्ता के नशे” का नतीजा बता रहा है, जबकि BJP इसे “सामान्य मानवीय प्रतिक्रिया” मान रही है।
क्या विजयवर्गीय का ये स्टाइल BJP के लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक? आप क्या सोचते हैं—गुस्सा आना सामान्य है या सदन में शब्दों पर कंट्रोल जरूरी? कमेंट में बताएं!
