कोबरा केस: एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, कहा- ‘जो मन करेगा वो नहीं कर सकते’
कोबरा केस: एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, कहा- ‘जो मन करेगा वो नहीं कर सकते’
नई दिल्ली: यूट्यूबर और बिग बॉस OTT 2 विनर एल्विश यादव को सांप के जहर (स्नेक वेनम) मामले में बड़ा झटका! सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (18 फरवरी 2026) को उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा, “आप जो मन में आए वो नहीं कर सकते।” कोर्ट ने जोर दिया कि लोकप्रिय हस्तियां ‘बेजुबान शिकार’ (voiceless victims) जैसे सांपों का इस्तेमाल नहीं कर सकतीं, वरना समाज को बहुत गलत संदेश जाता है।
क्या है पूरा मामला?
मामला नवंबर 2023 का है, जब नोएडा पुलिस ने एक रेव पार्टी की सूचना पर छापेमारी की।
पार्टी में कोबरा सहित 9 सांप और उनके जहर बरामद हुए। आरोप है कि सांपों के जहर का इस्तेमाल नशीले पदार्थ के रूप में किया जा रहा था।
एल्विश यादव पर वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, NDPS एक्ट और IPC के तहत केस दर्ज हुआ। मार्च 2024 में उनकी गिरफ्तारी हुई थी।
एल्विश ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें चार्जशीट और क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स को रद्द करने की मांग की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
बेंच ने एल्विश के वकील से सवाल किया: “क्या आप जू में जाकर जानवरों से खेल सकते हो? क्या वो अपराध नहीं होगा?”
कोर्ट ने कहा कि अगर मशहूर लोग सांप जैसे संरक्षित जीवों का इस्तेमाल करेंगे, तो समाज में गलत मैसेज जाएगा।
वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत जांच जरूरी है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से सांपों के जहर निकालने के तरीके और एल्विश की परमिशन पर स्पष्टीकरण मांगा।
सुनवाई टाल दी गई—अगली तारीख 19 मार्च 2026। तब तक ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर स्टे जारी रहेगा (अगस्त 2025 से स्टे है)।
क्यों है ये केस चर्चा में?
एल्विश पर आरोप है कि उन्होंने अपने यूट्यूब वीडियोज में सांपों का इस्तेमाल किया और रेव पार्टियों में जहर को ड्रग्स की तरह इस्तेमाल करवाया। कोर्ट ने साफ कहा कि सेलिब्रिटीज कानून से ऊपर नहीं हैं। ये मामला वाइल्डलाइफ क्राइम और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की जिम्मेदारी पर बड़ा संदेश दे रहा है।
फिलहाल, एल्विश की याचिका पर कोई राहत नहीं मिली—केस जारी रहेगा। क्या ये फैसला एल्विश के करियर पर असर डालेगा? या कोर्ट का रुख सख्त रहेगा? आपकी राय क्या है? कमेंट में बताएं!
