उधम सिंह नगर: नाबालिग बेटी की शादी रोककर पुलिस-बाल संरक्षण टीम ने बचाई जान! बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत 4 नामजद सहित अन्य पर मुकदमा
उधम सिंह नगर: नाबालिग बेटी की शादी रोककर पुलिस-बाल संरक्षण टीम ने बचाई जान! बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत 4 नामजद सहित अन्य पर मुकदमा
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के पुल भट्टा थाना क्षेत्र में एक गांव में 16 फरवरी 2026 की रात नाबालिग लड़की के बाल विवाह की सूचना मिलते ही पुलिस और बाल संरक्षण टीम ने त्वरित कार्रवाई की और विवाह को अंतिम समय पर रोक दिया। जांच में लड़की की उम्र वैधानिक विवाह आयु (18 वर्ष) से काफी कम पाई गई, जिसके बाद वर-वधू पक्ष के चार परिजनों के खिलाफ नामजद और अन्य के विरुद्ध बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
घटना का पूरा विवरण
सूचना मिलने पर इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल डेवलपमेंट (आईएसडी) की निदेशक बिंदुवासिनी ने डायल 112 पर कॉल किया।
पुलिस और बाल संरक्षण टीम मौके पर पहुंची तो पाया कि गांव के एक व्यक्ति अपनी 16 वर्षीय बेटी की शादी हरियाणा के जींद जिले के एक परिवार में करा रहे थे।
हरियाणा से बारात पहुंच चुकी थी और विवाह की तैयारियां अंतिम चरण में थीं – मंडप सजा था, मेहमान मौजूद थे।
दुल्हन की मां से आयु प्रमाण-पत्र मांगा गया, लेकिन कोई दस्तावेज नहीं दिखा सके।
पुलिस ने तुरंत विवाह रुकवा दिया और लड़की को आईएसडी निदेशक बिंदुवासिनी की सुपुर्दगी में सौंपा।
बाद में बाल कल्याण समिति (CWC) के माध्यम से लड़की को वन स्टॉप सेंटर, रुद्रपुर भेजा गया, जहां उसकी काउंसलिंग, सुरक्षा और देखभाल की व्यवस्था की गई।
जांच और कानूनी कार्रवाई
17 फरवरी को एसआई रिनी चौहान ने बाल कल्याण समिति पहुंचकर मामले की विस्तृत जानकारी ली।
प्राप्त दस्तावेजों (जन्म प्रमाण-पत्र/स्कूल रिकॉर्ड) से लड़की की उम्र 15 वर्ष और दूल्हे की उम्र 24 वर्ष पाई गई।
पुलिस ने लड़की के माता-पिता, दूल्हे और दूल्हे के पिता सहित अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया।
पुलिस का बयान
पुल भट्टा थाना प्रभारी निरीक्षक प्रदीप मिश्रा ने कहा:
“मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। हमने स्पष्ट किया कि बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जाएगी। आमजन से अपील है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले तो तुरंत प्रशासन को अवगत कराएं, ताकि समय रहते इस कुप्रथा पर रोक लगाई जा सके।”
यह घटना बाल विवाह के खिलाफ उत्तराखंड पुलिस और सामाजिक संगठनों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई का उदाहरण है। ऐसे मामलों में समाज के सहयोग से ही इस सामाजिक कुरीति को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
