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2 महीने से जेल में कट रही थी विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी की रातें: सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, 30 करोड़ ठगी मामले में अंतरिम जमानत!

2 महीने से जेल में कट रही थी विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी की रातें: सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, 30 करोड़ ठगी मामले में अंतरिम जमानत!

मुंबई/नई दिल्ली: बॉलीवुड फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार (13 फरवरी 2026) को 30 करोड़ रुपये (कुछ रिपोर्टों में 44 करोड़ तक) की कथित धोखाधड़ी के मामले में दोनों को अंतरिम जमानत (interim bail) दे दी है। दोनों दिसंबर 2025 से उदयपुर सेंट्रल जेल में बंद थे, जहां वे 7 दिसंबर 2025 को मुंबई से गिरफ्तार होने के बाद पहुंचे थे। अब उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

मामले की पूरी डिटेल:

राजस्थान पुलिस ने उदयपुर के एक डॉक्टर/व्यापारी अजय मुर्डिया (Indira IVF के मालिक) की शिकायत पर यह केस दर्ज किया था।

आरोप: विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी ने फिल्म प्रोडक्शन के नाम पर भारी रिटर्न (200 करोड़ तक का वादा) देने का लालच देकर 30 करोड़ रुपये ठगे।

राजस्थान हाई कोर्ट ने 31 जनवरी 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई में कहा: “आपराधिक मामलों का इस्तेमाल पैसे वसूली के लिए नहीं किया जा सकता। हर किसी को जेल में नहीं डाला जा सकता।” कोर्ट ने श्वेतांबरी की गिरफ्तारी को “अफसोसजनक” (unfortunate) भी बताया।

आदेश: श्वेतांबरी को तुरंत रिहा किया जाए। उदयपुर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट से जमानत शर्तें तय करवाई जाएंगी। विक्रम भट्ट की जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 19 फरवरी 2026 को होगी।

कोर्ट ने राजस्थान पुलिस और शिकायतकर्ता से जवाब भी मांगा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

दोनों करीब 67-68 दिन (2 महीने से ज्यादा) जेल में थे, जो बॉलीवुड के लिए बड़ा झटका था।

यह मामला फिल्म इंडस्ट्री में फाइनेंशियल डील्स और निवेश घोटालों की याद दिलाता है, जहां प्रोडक्शन फंड्स के नाम पर ठगी के आरोप आम हैं।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिखाता है कि जमानत में देरी नहीं होनी चाहिए, खासकर जब मामला सिविल डिस्प्यूट जैसा लगे।

विक्रम भट्ट ‘रागिनी MMS’, ‘1920’, ‘भूल भुलैया’ जैसी हिट फिल्मों के डायरेक्टर हैं। रिहाई के बाद वे अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। जांच अभी भी चल रही है, और केस का फैसला बाद में होगा।

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