सुप्रीम कोर्ट से उत्तराखंड को बड़ी राहत: लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग पर लगी रोक हटी, निर्माण का रास्ता साफ
सुप्रीम कोर्ट से उत्तराखंड को बड़ी राहत: लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग पर लगी रोक हटी, निर्माण का रास्ता साफ
देहरादून/कोटद्वार, 12 फरवरी 2026: उत्तराखंड के कोटद्वार क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग के निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण फैसला आया है। अदालत ने इस 11.5 किलोमीटर लंबी सड़क पर लगी रोक (स्टे) को हटा दिया है, जिससे निर्माण कार्य फिर से शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह सड़क राजाजी नेशनल पार्क से जुड़े सेंट्रल फॉरेस्ट एरिया से गुजरती है, जहां 4.7 किमी हिस्सा वन क्षेत्र में पड़ता है, जिसके कारण पर्यावरणीय चिंताओं पर रोक लगी थी।
सुनवाई के दौरान गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने इंटरवेंशन एप्लीकेशन दायर कर क्षेत्रीय जनहित का मजबूत पक्ष रखा। नई दिल्ली से सांसद बांसुरी स्वराज ने उनके वकील के रूप में प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप अदालत ने स्टे को समाप्त कर दिया। टी.एन. गोदावर्मन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में यह आदेश पारित हुआ।
मुख्य बिंदु:
सड़क का निर्माण अब शुरू हो सकेगा, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार डामरीकरण (ब्लैक-टॉपिंग) की अनुमति मिली है, जबकि व्यावसायिक वाहनों (ट्रक, डंपर आदि) के संचालन पर रोक बरकरार रहेगी।
इससे कोटद्वार क्षेत्र के 18 गांवों और 40,000 से अधिक आबादी को ऑल वेदर कनेक्टिविटी मिलेगी। हरिद्वार और मैदानी इलाकों तक सीधी पहुंच आसान हो जाएगी।
वर्तमान में लोग लंबा, घुमावदार और जोखिम भरा रास्ता अपनाते हैं, खासकर बरसात में भूस्खलन और जलभराव की समस्या से जूझते हैं।
सड़क से स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, रोजगार, कृषि-दुग्ध उत्पादों की मार्केटिंग और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना आसान होगा।
कोटद्वार विधायक एवं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने इसे “ऐतिहासिक निर्णय” करार दिया। उन्होंने कहा, “यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि कोटद्वार और आसपास के ग्रामीण अंचलों के लिए जीवन रेखा है। पिछले चार सालों से मैं लगातार प्रयासरत थी—शासन स्तर पर संवाद, विभागों से समन्वय और सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की। मेरी प्रतिबद्धता के कारण आज यह सकारात्मक आदेश आया।”
सांसद अनिल बलूनी ने भी क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह फैसला सामाजिक-आर्थिक विकास की जीवन रेखा है। राज्य सरकार अब वन स्वीकृतियों से जुड़े बाकी प्रक्रियात्मक काम जल्द पूरा कर निर्माण को गति देने की तैयारी में है।
स्थानीय ग्रामीणों और संघर्ष समितियों ने लंबे समय से इस मांग को उठाया था। कुछ जगहों पर अनशन और धरना भी चल रहे थे। यह फैसला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा था। क्षेत्र में अब विकास की नई उम्मीद जगी है, और पर्यावरण नियमों का पालन करते हुए सड़क जल्द पूरी होने की संभावना है।
